बसोहली। हट्ट पंचायत के कछीड इलाके में वार्ड 5 के लोग मूलभूत सुविधाएं न मिल पाने से भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कहने को उनके इलाके में जनता दरबार लगाकर अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का मौका दिया जाता है। लेकिन, अधिकारी बताते हैं कि जनता दरबार में कोई आता ही नहीं।
हालांकि, हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उपमंडल के दूरदराज व पहाड़ी इलाके के लोगों को ब्लॉक दिवस या जनता दरबार लगाए जाने की जानकारी तक नहीं मिलती। क्योंकि, जनता दरबार व ब्लॉक दिवस का आयोजन केवल सरकारी कार्यालयों और अन्य स्थानों पर बंद कमरों में होता है। लोग इनमें पहुंच नहीं पाते, और अपनी बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचा नहीं पाते।
लोगों ने कहा है कि अपनी समस्याएं सुनाएं, तो किसे सुनाएं? प्रशासनिक अधिकारी उनके गांव में आते नहीं। बसोहली व अन्य स्थानों में जो जनता दरबार ब्लॉक दिवस पर लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी खबर ग्रामीण इलाकों के लोगों को नहीं होती है। सरकार से विनती है जमीनी हकीकत को देखे और यहां का विकास कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी करे।
वार्ड 5 के शंकर कुमार ने बताया कि समय पर बिजली बिल पहुंच रहा है, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। खेती-बाड़ी पर बंदरों और जानवरों के आतंक से रोजगार खत्म हो गया है। पढ़ी-लिखी पीढ़ी को भी रोजगार नहीं मिल रहा है। सरकार की किसी भी स्कीम का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इस पर लोगों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी है।
काजल देवी ने बताया कि गांव में रास्तों की हालत ऐसी है, कि इन पर सिर्फ जानवर ही चल सकते हैं। वाहन भी इस रास्ते पर बमुश्किल चल पाते हैं। रास्ता इतना ऊबड़-खाबड़ है कि कई बार लोग मार्ग तक भूल जाते हैं। वहीं, अगर कच्चे रास्ते पर पस्सी गिर जाए तो वह और बदहाल हो जाता है। विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। बिजली न होने की सूरत में उन्हें पढ़ाई करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भोली देवी ने बताया कि गांव में न तो प्राथमिक चिकित्सा केंद्र है, और न ही कोई स्कूल। लोगों को उपचार के लिए गांव से कई किलोमीटर पैदल चलकर हट्ट पीएचसी जाना पड़ता है। वहीं, स्कूल न होने के कारण विद्यार्थियों को भी घंटों पैदल चलकर हायर सेकेंडरी स्कूल हट्ट जाना पड़ता है। कोरोना टीकाकरण के लिए भी लोगों को जानकारी नहीं दी जाती। लोग खुद फोन कर जानकारी लेते हैं।
मोनिका रानी ने बताया कि हर पंचायत के लिए सरकार पंचायतों में लाखों का फंड दे रही है। लेकिन, उनके गांव में न गली बनी है, और न नालियां बनी हैं। आखिर उन रुपयों का उपयोग कहां हुआ? उनके गांव में आज तक न तो ग्रामीण विकास विभाग के कोई अधिकारी पहुंचे हैं, और न ही प्रशासनिक अधिकारी ने जमीनी स्तर का जायजा लिया है।
काजल राजपूत निवासी कछीड़- फोटो : KATHUA
मोनिका रानी- फोटो : KATHUA
बसोहली कछीड़ को जाने वाला कच्चा मार्ग- फोटो : KATHUA