कठुआ। पठानकोट जिले में डेंगू के मामले 150 के पार होने के बाद कठुआ जिले में भी अलर्ट हो गया है। अंतरराज्यीय सीमा को साझा करने वाले पठानकोट और कठुआ जिलों में लखनपुर से लेकर कठुआ शहर और ग्रामीण इलाकों में भी स्वास्थ्य विभाग ने टीमों को अलर्ट जारी कर दिया है। उधर, मामले में नगर परिषद कठुआ को भी सोमवार को लिखा जाएगा, ताकि नियमित रूप से तराई वाले और झुग्गी वाले इलाकों में फॉगिंग की जा सके।
डेंगू के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने औद्योगिक क्षेत्र के आसपास और शहर के निचले इलाकों में नजर रखी हुई है। अधिकारी ने बताया कि पिछले सीजन के रिकॉर्ड को देखते हुए संभावित इलाकों में टीमों को सक्रिय किया गया है। लोगों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध मामले को तुरंत रिपोर्ट करें और एहतियात बरतें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक चौधरी ने बताया कि जिले में फिलहाल डेंगू का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन, डेंगू को लेकर एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मलेरिया विंग की टीमों को विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करने को कहा गया है। इसके साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर भी टीमों को लक्षणों वाले मामले फौरन रिपोर्ट करने को कहा गया है।
उधर, प्राप्त जानकारी के अनुसार पठानकोट शहर में डेंगू ने तेजी से पैर पसार लिए हैं। रोजाना औसतन 14 मामले डेंगू के रिपोर्ट होने लगे हैं।
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क्या है डेंगू बुखार
डेंगू बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है। एक बार डेंगू बुखार होने के बाद इस संक्रमण से मरीज को लंबे समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता वापस मिल जाती है। लेकिन, दूसरी बार डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है। दूसरी बार डेंगू बुखार को डेंगू हेमोरहेजिक फीवर कहते हैं। यह बुखार हवा, पानी, साथ खाना खाने या छूने से नहीं फैलता। यह संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति को दूसरे मच्छर के काटने से यह संक्रमण उस मच्छर में दाखिल हो जाता है। जिससे अन्य लोगों को भी इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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लक्षण और बचाव
संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से 14 दिन के भीतर डेंगू के लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें सर्दी लगना, बुखार, सिरदर्द, आंखों में दर्द, बदन दर्द / जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, उल्टी-दस्त होना, चमड़ी के नीचे लाल चट्टे आना, गंभीर स्थिति में आंख, नाक में से खून भी निकल सकता है। ऐसा होने पर डॉक्टर की तुरंत सलाह लेकर उसके अनुरूप ही दवा लेनी चाहिए। इस दौरान बुखार में सिरदर्द की दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्त में प्लेटलेट काउंट की जांच करानी चाहिए। इससे बचने के लिए घरों के आसपास और खाली बर्तनों, गमलों, आदि में पानी जमा न होने दें। साफ-सफाई रखें। सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें। शरीर को ढंकने वाले पूरे कपड़े पहनें।