कठुआ। जिले के दूर दराज पहाड़ी सब डिवीजन बनी में बैसाखी मेले का बुधवार को रंगारंग आगाज हो गया। बैसाखी उत्सव कमेटी द्वारा जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी के सहयोग से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। सांस्कृतिक रंग के साथ मेले के पहले दिन शिल्प मेले ने भी लोगों को आकर्षित किया। किश्तवाड़ जिले के दूर दराज पाडर की संस्कृति से लेकर मेले में रामनगर, उधमपुर, कश्मीर और बनी की लोक संस्कृति को कलाकारों ने प्रस्तुत किया तो दर्शक भी झूम उठे।
मेले का उद्घाटन डीडीसी बनी की सदस्य रीता ठाकुर, एसडीएम बनी जोगिदं सिंह जसरोटिया और अकादमी के अतिरिक्त सचिव संजीव राणा ने किया। दो दिवसीय मेले के पहले दिन राम दित्ता और पार्टी, सरगम सांस्कृतिक समाज, मुख्तियार और पार्टी, जॉनी और पार्टी, मोहन लाल और पार्टी, संजीत मेहरा और पार्टी, सुमन लता और पार्टी, पाडरी लोक काला मंच, राज कुमार और पार्टी, सुदेश कुमार और पार्टी, पंकज हंडू और पार्टी, दर्मेज संधू, वरिंदर कुमार, अजीत कुमार और कैलाश कुमार ने दर्शकों की एक बड़ी सभा के सामने विभिन्न लोक संगीत और नृत्य रूप प्रस्तुत किए। जम्मू कश्मीर की लोक संस्कृति पर आधारित गीतडू, कुड, नाटी, जात्र, पाडरी नृत्य, हरन, पहाड़ी कुड, कश्मीरी रौफ, डोगरी नृत्य आदि शामिल रहे।
मेले में स्थानीय व्यंजन भी लोगों को खूब आकषित कर रहे हैं। पहाड़ी खान पान को इन स्टॉल में शामिल किया गया है। एसडीएम बनी जोगिंद्र सिंह जसरोटिया ने जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी के प्रयासों की सराहना की। बैसाखी उत्सव कमेटी के सदस्यों ने भी अकादमी का आभार जताया। स्थानीय लोगों ने इलाके में पर्य टन को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के मेलों के वार्षिक आयोजन पर बल दिया। अकादमी के अतिरिक्त सचिव संजीव राना ने कहा कि भाषा, कला और संस्कृति किसी भी इलाके की विरासत हैं, जिन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है और यह मेला क्षेत्र में पर्यटन से लेकर रोजगार के द्वार भी खोलने का काम करेगा।
बनी में आयोजित बैसाखी मेले के दौरान लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद- फोटो : KATHUA