लाखड़ी में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन संत सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को सत्संग का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि सत्य केवल परमात्मा है। उन्होंने कहा कि जो परमात्मा का संग करता है, सही मायने में वही सत्संग करता है।
उन्होंने कथा के आरंभ में कहा कि जीवन में सत्संग का महत्व बहुत ज्यादा है। लेकिन मानव सत्संग का सही मतलब नहीं जानता है। सत्संग का मतलब परमात्मा का संग करना होता है। यह सतगुरु की शरण में ही जाकर हो सकता है।
संत ने कहा कि जो कुसंग का संग करता है, तो वह अपने लिए परेशानियों और दुख पैदा करता है। कुसंग जहर की तरह होता है। फिर एक दिन इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसलिए हमें हमेशा ख्याल रखना चाहिए कि हम किसका संग कर रहे हैं और भविष्य में इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कुसंग में फंस जाता है, तो वह सत्संग में आकर अपने आपको इस जाल से बाहर निकाल सकता है। सत्संग में ही मानव को जीवन जीने की सही राह मिलती है। उन्होंने कहा कि मानव को सजग रहकर परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए।
भक्ति से जीवन में सुख प्राप्त होते हैं और परिवार में भी सुख शांति का वास होता है। डीडीसी सदस्य नारायण दत्त त्रिपाठी और पवन कुमार ने लोगों को सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए सत्संग में शामिल होने की अपील की। साथ ही मास्क पहनने पर जोर दिया।