भट का परिवार चोटीगाम के दो कश्मीरी पंडित परिवारों में से एक हैं। चोटीगाम शोपियां से 10 किमी और श्रीनगर से लगभग 70 किमी दूर है। इस क्षेत्र में आतंकी घटनाएं होती रहती हैं और यह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का गढ़ माना जाता है।
बाल कृष्ण भट के भाई अनिल भट (32) ने बताया, ''हम सब यहां साथ में रहते हैं और कभी यह स्थान नहीं छोड़ा। मैं यह भी कहूंगा कि हमने कभी डर महसूस नहीं किया। हमारे सभी पड़ोसी बहुत अच्छे हैं लेकिन हम बंदूक का सामना कैसे करेंगे। भाई के अस्पताल से लौटने के बाद हम आगे की योजना बनाएंगे।''
पड़ोसियों ने घाटी नहीं छोड़ने की अपील की
मंगलवार को भट परिवार के कई पड़ोसी उनसे मिलने आए और उनके प्रति अपना समर्थन जताया।
एक पड़ोसी मुख्तसिर अहमद लोन ने कहा, ''गोलियों और चिल्लाने की आवाज सुनते ही मैं अपने भतीजे और दोस्तों के साथ मौके की तरफ दौड़ा। हम सोनू (बाल कृष्ण भट) को शोपियां ले गए। भट को सेना के अस्पताल पहुंचने के बाद मैं और मेरा पूरा परिवार भट के घर पर रुका। सोनू और मैं साथ-साथ बड़े हुए हैं और हम लोगों में कोई भेद नहीं है। हम सब एक हैं और इंशाअल्लाह हम हमेशा एक रहेंगे।''
एक अन्य पड़ोसी फयाज अहमद ने कहा कि सोनू गांव में सबका चहेता है क्योंकि वह मेडिकल एमरजेंसी में लोगों की सहायता करने के लिए आधी रात में भी दुकान खोल देता था। बाल कृष्ण भट के पिता पंडित जानकी नाथ भट ने मंगलवार को उनके घर पहुंचे पड़ोसियों से बात की। पड़ोसियों ने उनसे घाटी नहीं छोड़ने की अपील की।