हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। पाकिस्तान में वो जमात-उद-दावा नामक संगठन चलाता है। हाफिज सईद का जन्म पांच जून 1950 को पाकिस्तान के सरगोधा, पंजाब में हुआ था। अभी उसकी उम्र 70 साल है। उसकी पत्नी का नाम मैमूना सईद और बेटे का नाम तलहा सईद है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उसका परिवार हरियाणा के हिसार से लाहौर चला गया था।
इंजीनियर सईद, भारत में चाहता था इस्लामिक शासन
हाफिज मूलरूप से इंजीनियर है और अरबी भाषा का प्रोफेसर भी रह चुका है। अमेरिकी सरकार की वेबसाइट रिवार्ड्स फॉर द जस्टिस में भी हाफिज सईद को जमात-उद-दावा, अहले हदीद और लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक बताया गया है। अहले हदीद एक ऐसा इस्लामिक संगठन है जिसकी स्थापना भारत में इस्लामिक शासन लागू करने के लिए की गई है।
हाफिज सईद 2008 (26/11) में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का मास्टरमाइंड है। इस हमले में छह अमेरिकियों सहित 164 लोगों की मौत हो गई थी। 2006 में मुंबई ट्रेन धमाकों में भी हाफिज सईद का हाथ रहा। 2001 में भारतीय संसद तक को सईद ने निशाना बनाया। वो एनआइए की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल है।
मुंबई हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था। लेकिन पाकिस्तान लगातार सईद को आतंकी मानने से इनकार करता रहा है। भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और ऑस्ट्रेलिया ने इसके दोनों संगठनों को प्रतिबंधित कर रखा है।
1979 में ओसामा के उस्ताद से की मुलाकात
1979 में सईद अफगानिस्तान के मुजाहिद अब्दुर रसूल सय्यफ के प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुआ। वहां उसकी मुलाकात अलकायदा के संस्थापक सदस्य अब्दुल्ला अज्जम से हुई, जिसने ओसामा बिन लादेन को भी पढ़ाया था।
2008 में हुए मुंबई हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी। 2012 में अमेरिका ने उसके सिर पर 10 मिलियन डॉलर (लगभग 70 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित कर दिया। हालांकि, सईद ने अमेरिका की इस घोषणा को हास्यास्पद करार दिया था। 2014 में दिए एक साक्षात्कार में सईद ने कहा था कि मुंबई हमलों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
भारत के आग्रह पर इंटरपोल ने हाफिज सईद के खिलाफ 25 अगस्त 2009 को रोड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। रेड कॉर्नर नोटिस के बावजूद वो पाकिस्तान में खुलेआम घूमता दिखाई देता था। उसे पाकिस्तान में खुले घूमने और सभाएं करने की आजादी मिली हुई थी।
साल 2017 की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई में सईद को नजरबंद कर दिया गया था। बाद में सईद को नवंबर 2017 में रिहा कर दिया गया था। इसके बाद जुलाई 2018 में पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे सूची में डाल दिया गया था।
सईद की दोबारा गिरफ्तारी
जेयूडी प्रमुख सईद को 17 जुलाई 2019 में काउंटर टेररिजम डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय वह लाहौर से गुजरांवाला की यात्रा कर रहा था। गिरफ्तारी से पहले, लाहौर, गुजरांवाला, मुल्तान, फैसलाबाद और सरगोधा के पुलिस स्टेशनों पर सईद और अमीर अब्दुल रहमान मक्की सहित जेयूडी नेताओं के खिलाफ 23 एफआईआर दर्ज की गईं। सभी पर आतंकवाद के वित्तपोषण का आरोप लगाया गया। इसके बाद सईद को आतंकवाद के वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग के साथ-साथ अवैध भूमि हथियाने से संबंधित लगभग 29 मामलों में नामजद किया गया।