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जब केबिन प्रेशर की वजह से ही विमान हो गया था क्रैश, 121 लोगों की हुई थी मौत

Fri, 21 Sep 2018 11:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Cabin pressure flight
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जेट एयरवेज की फ्लाइट में हुई एक चूक ने जहाज में बैठे 166 यात्रियों की सांस हलक में ही अटका दी। दरअसल, उड़ान भरते समय चालक दल के सदस्य 'ब्लीड स्वीच' सेलेक्ट करना भूल गए, जिसकी वजह से केबिन प्रेशर सामान्य नहीं रखा जा सका और ऑक्सीजन मास्क नीचे आ गए। इस दौरान यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई होने लगी और उनके नाक-कान से खून बहने लगा। 

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हालांकि यात्रियों की परेशानी को देखते हुए तुरंत ही विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करा दी गई, जिससे यात्रियों की जान बच गई, नहीं तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। विमान के दोनों पायलटों को फिलहाल काम से हटा दिया गया है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।  

आपको बता दें कि ठीक ऐसी ही एक घटना 13 साल पहले ग्रीस (यूनान) में हुई थी। यहां एक पहाड़ी इलाके में एक बोइंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी। एक साल बाद, घटना की जांच कर रहे अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि केबिन प्रेशर को नियंत्रित करने में हुई चूक दुर्घटना का एक प्रमुख कारण थी। 
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दरअसल, हेलिओस एयरवेज की फ्लाइट संख्या 522 ने 14 अगस्त, 2005 को साइप्रस के लर्नाका से ग्रीस (यूनान) के एथेंस के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन बीच रास्ते में ही विमान क्रैश हो गया। इस दुर्घटना में चालक दल के सदस्यों सहित कुल 121 यात्रियों की मौत हो गई थी, जिसमें साइप्रस के 103 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स, जर्मनी का एक पायलट, यूनान के 12 यात्री और 6 क्रू मेंबर्स शामिल हैं। 

यूनान के लिए उड़ान भरने से पहले वह विमान लंदन गया था और 14 अगस्त की सुबह ही वो साइप्रस पहुंचा था। इस दौरान चालक दल के एक सदस्य ने विमान के दाईं ओर का दरवाजा जाम होने और असामान्य शोर होने की शिकायत की थी। उसने दरवाजे का पूरी तरह से निरीक्षण करने का अनुरोध भी किया था, जिसके बाद एक ग्राउंड इंजीनियर द्वारा केबिन प्रेशर की जांच भी की गई थी। 

जांच के बाद विमान की दबाव प्रणाली को 'मैनुअल' पर सेट कर दिया गया। हालांकि, इंजीनियर विमान के परीक्षण के पूरा होने पर उसे 'ऑटो' मोड पर रीसेट करने में विफल रहे। इसके बाद विमान को उड़ने की इजाजत दे दी गई। 

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यहां आपको बता दें कि विमान के चालक दल के सदस्यों ने विमान के उड़ान से पहले तीन अलग-अलग मौकों पर दबाव प्रणाली को नजरअंदाज कर दिया। हैरानी की बात तो ये रही कि चालक दल के किसी भी सदस्य ने दबाव प्रणाली की गलत सेटिंग पर ध्यान ही नहीं दिया। 

इसके बाद विमान जैसे ही उड़ा और हवा में पहुंचा तो केबिन के अंदर धीरे-धीरे दबाव कम होने लगा। जब विमान 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचा तो दबाव प्रणाली की ओर से चालकों को चेतावनी मिलने लगी। धीरे-धीरे विमान के अंदर दबाव बढ़ता चला गया, जिसका नतीजा ये हुआ कि विमान जल्द ही क्रैश हो गया और एक बड़ी दुर्घटना हो गई। 
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