दरअसल, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी तेजी से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उसके नेता अपने भाषणों में बार-बार भाजपा के मुकाबले स्वयं को विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। उन्हें मालूम है कि अगर राष्ट्रीय राजनीति में लंबी दूरी तय करनी है तो उन्हें सबको साथ लेकर चलना होगा। किसी जाति-धर्म विशेष का ठप्पा लगते ही किसी भी राजनीतिक दल की एक सीमा निर्धारित हो जाती है। यही कारण है कि वे हर समाज, हर जाति के समर्थन की बात करते हुए दिखाई पड़ते हैं।
पार्टी नेता के मुताबिक, कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर सबसे मजबूत पार्टी थी, लेकिन उसके ऊपर भाजपा ने जानबूझकर मुस्लिमों का तुष्टीकरण करने का ठप्पा चिपकाने का प्रयास किया जो धीरे-धीरे उसके साथ जुड़ता चला गया। आज कहीं न कहीं कांग्रेस को इसका राजनीतिक नुकसान भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी इसी तरह की कोई ठप्पा अपने साथ नहीं चिपकने देना चाहती, लिहाजा वह पहले से ही सतर्क है और समय-समय पर यह संदेश देने की कोशिश भी करती है। गणेश पूजा और दिवाली पूजा इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
वहीं, बीजेपी दिल्ली की प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति दिखाने की अलग और असलियत में अलग होती है। उन्होंने कहा कि वे बात तो राष्ट्रीयता, सर्वधर्मसमभाव वाली कहते हैं, लेकिन असलियत में वे एक वर्ग विशेष का तुष्टीकरण करते हैं। वे मौलवियों को आर्थिक सहायता के नाम पर हर महीने वेतन देते हैं, लेकिन हिंदू हो या बौद्ध, किसी अन्य धर्म के पुजारियों को यही सुविधा नहीं देते।
उन्होंने कहा कि वे हज हाउस तो बनवाते हैं, लेकिन हिंदू-बौद्ध या ईसाई समुदाय के लोगों के लिए कोई निर्माण नहीं करते। वे राष्ट्रवाद की बात करते हैं, लेकिन कश्मीर की आजादी की बात करने वाले लोगों को समर्थन देते हैं, क्या इसे राष्ट्रवाद कहेंगे। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति की कलई खुल चुकी है और जनता अब उनकी असलियत पहचानती है।