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11 सीटों पर नजर: राम से भाषण की शुरुआत, खेला होबे पर हमला, पढ़ें पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

Thu, 18 Mar 2021 12:55 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरुलिया
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प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान जारी है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (18 मार्च) पुरुलिया में रैली की और ममता बनर्जी पर तगड़ा हमला बोला। पीएम मोदी ने बांग्ला में भाषण की शुरुआत कर पुरुलिया और भगवान राम का कनेक्शन जोड़ा। इसके अलावा खेला होबे के बहाने ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया। बता दें कि पीएम मोदी की रैली जिस इलाके में हुई, उसके अंतर्गत 11 विधानसभा सीटें आती हैं और इनमें से नौ सीटों पर पहले चरण यानी 27 मार्च को मतदान होना है। इस रिपोर्ट में हम पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातों से रूबरू कराते हैं। 

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राम के नाम से भाषण की शुरुआत

पीएम मोदी ने कहा कि यह धरती भगवान राम और माता सीता के वनवास की भी साक्षी रही है। यहां अजुध्या पर्वत है, सीता कुंड है। अजुध्या नाम से ग्राम पंचायत भी है। कहते हैं कि जब माता सीता को प्यास लगी तो भगवान राम ने जमीन में बाण मारकर पानी की धारा निकाल दी। सोचिए तब पुरुलिया की जमीन में पानी का स्तर क्या रहा होगा? यह विडंबना है कि आज मेरे किसान आदिवासी भाइयों को इतना पानी भी नहीं मिलता कि वे सही से खेती कर सकें। यहां की महिलाओं को पीने के पानी के इंतजाम के लिए बहुत दूर तक जाना पड़ता है। माना जा रहा है कि भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करके पीएम मोदी ने एक बार फिर जय श्रीराम के नारे को हवा दे दी है।

पानी और पलायन से सरकार को घेरा

पीएम मोदी ने कहा कि पुरुलिया में पानी का संघर्ष सबसे बड़ी समस्या है। यहां पहले वामपंथियों और फिर तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने उद्योगों को पनपने नहीं दिया। पानी के लिए जो इंतजाम होने थे, वे नहीं किए गए। यहां लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की जगह टीएमसी सरकार अपने ही खेल में लगी रही। इन लोगों ने पुरुलिया को जल संकट, पलायन और भेदभाव भरा शासन दिया। इन्होंने पुरुलिया की पहचान देश के सबसे पिछड़े इलाके के रूप में बना दी। यहां गैस पाइपलाइन का काम आठ साल से अधूरा पड़ा है। बांध का काम भी अधूरा है। इसका जवाब कौन देगा? दीदी यहां के लोग आपसे जवाब मांग रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में जाति-धर्म की राजनीति के बीच पीएम मोदी ने विकास के मुद्दे को भी उठाने की कोशिश की।

खेला होबे पर बोला हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस बार बंगाल के चुनाव में तोलबाजों की पराजय होगी। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के दिन गिनती के ही रह गए हैं। यह बात ममता दीदी भी अच्छी तरह समझ रही हैं। खेला होबे, खेला होबे। जब जनता की सेवा का संकल्प हो, विकास के लिए दिन-रात एक संकल्प हो, तब खेला नहीं खेला जाता दीदी। इसलिए दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले विकास होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले शिक्षा होबे। भाजपा बोले महिला का उत्थान होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले संपूर्ण विकास होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले सोनार बांग्ला होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले नौकरी होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले अस्पताल होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले नौकरी होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले स्कूल होबे। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ने तृणमूल कांग्रेस के खेला होबे नारे पर हमला बोलकर उसे खारिज करने की पूरी कोशिश की है।

तुष्टिकरण का मुद्दा भी उठाया 

गौर करने वाली बात है कि भाजपा लगातार टीएमसी पर तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में भी इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'बंगाल की जनता को याद है कि जब आपने देश की सेना पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप लगाया। जब पुलवामा पर हमला हुआ, तब आप किसके साथ खड़ी थीं, यह सबको याद है। दिल्ली की कोर्ट ने बहुत बड़ा फैसला दिया। यह बाटला हाउस से जुड़ा है। इस फैसले ने आतंकवाद और उनका साथ देने वालों का चेहरा उजागर कर दिया। इसमें एक इंस्पेक्टर शहीद हुआ, लेकिन ममता दीदी और उस समय उनकी पार्टी का व्यवहार कोई भूल नहीं सकता। तब ये लोग आतंकवाद के साथ खड़े थे। बंगाल में घुसपैठ को हवा देने की भी एक ही वजह है तुष्टिकरण। भारत को वंदेमातरम का पाठ पढ़ाने वाली इस जमीन पर दीदी से किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी। 
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ममता की चोट पर बटोरी सहानुभूति

गपीएम मोदी ने अपने भाषण में ममता बनर्जी को लगी चोट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए तो दीदी भी भारत की एक बेटी हैं, जिनका सम्मान हमारे संस्कारों में रचा-बसा है। जब उन्हें चोट लगी तो हमें भी चिंता हुई। मेरी प्रार्थना है कि उनकी चोट जल्द से जल्द ठीक हो। दरअसल, ममता की चोट से बंगाल चुनाव में टीएमसी को सहानुभूति मिलने के दावे किए जा रहे हैं। अन्य राजनीतिक पार्टियों को इससे निपटने का रास्ता ही नहीं मिल रहा। ऐसे में पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर दीदी के लिए चिंता जाहिर करके जनता की सहानुभूति का रुख भाजपा की ओर मोड़ने की कोशिश की।
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