पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान हो गया है। चुनाव आयोग ने अपनी प्रेसवार्ता में तारीखों की घोषणा करते हुए प्रदेश में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराने की जानकारी दी है। बता दें कि पिछले साल यानि कि 2016 में पश्चिम बंगाल के चुनाव छह चरणों में हुए थे।
बहरहाल निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान होगा। प्रदेश में 27 मार्च को पहले चरण में मतदान होगा। इसके बाद 1 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा। तीसरे चरण में 6 अप्रैल, चौथे चरण में 10 अप्रैल, पांचवें चरण में 17 अप्रैल, छठे चरण में 22 अप्रैल और सातवें चरण में 26 अप्रैल को मतदान होगा। इसके बाद 29 अप्रैल को आठवें चरण का मतदान होगा। 2 मई को मतगणना के बाद नतीजे घोषित होंगे।
चार मई से होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए आयोग ने 2 मई को चुनाव कार्यक्रम खत्म करने का फैसला लिया है। बता दें कि 2016 में छह चरणों में मतदान किए गए थे। पहले चरण में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहले मतदान करवाया गया था। इसके बाद 17, 21, 25, 30 और पांच मई को चरणबद्ध तरीके से मतदान की प्रक्रिया की गई थी।
वहीं चुनाव के नतीजे 19 मई को घोषित किए गए थे। 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया था और 211 सीटों पर अपनी दर्ज की थी। इसके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस थी, जो सिर्फ 44 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। बता दें कि 2016 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी मात्र तीन सीटें जीती थी। हालांकि इस साल का मुकाबला सिर्फ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच देखा जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे
पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा व्यवस्था की आती है और हर साल की तरह इस साल भी चुनाव आयोग ने सुरक्षा के चाकचौबंद प्रबंध किए हैं। पिछली बार विधानसभा चुनावों के दौरान करीब एक लाख केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में शांति से चुनाव प्रक्रिया पूरी हो सके, इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की 125 कंपनियों को तैनात किया जाएगा। इसमें सीआरपीएफ की 60, बीएसएप की 25, एसएसबी की 30, सीआईएसएफ की पांच और आईटीबीपी की पांच कंपनी शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के पास हैं 211 विधायक
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटे हैं। इसमें से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पास 211 विधायक हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 44, लेफ्ट ने 32 तो भारतीय जनता पार्टी ने मात्र तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी। यहां बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है।