कानून मंत्री ने विधेयक को लेकर कहा कि बंगाल की घटना शर्मसार करने वाली है। इसकी देश और दुनिया में निंदा हुई है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक पत्र लिखा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन ऐसे कोर्ट पहले से बने हैं।
अमर उजाला संवाद के मंच पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने पश्चिम बंगाल के नए दुष्कर्म निरोधक कानून को कवर-अप करार दिया है। ममता बनर्जी सरकार के इस विधेयक पर भारत के कानून मंत्री की यह पहली प्रतिक्रिया है।
विज्ञापन
कानून मंत्री ने विधेयक को लेकर कहा कि बंगाल की घटना शर्मसार करने वाली है। इसकी देश और दुनिया में निंदा हुई है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक पत्र लिखा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन ऐसे कोर्ट पहले से बने हैं। उन्होंने सब कुछ कवर अप करने के लिए उन्होंने पत्र लिखा है। ताकि लोगों को लगे कि ऐसे कोई कोर्ट नहीं हैं। जबकि महिलाओं और बच्चियों पर होने वाले अपराधों को लेकर फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट पहले से बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि बंगाल में फास्ट ट्रैक कोर्ट खुले ही नहीं हैं। बंगाल ने इस दिशा में कोई विशेष काम ही नहीं किया। यह सब कवर अप करने के लिए किया जा रहा है। घटना निंदनीय है। शर्मसार करने वाली है। इनसे कोई कवर अप होगा मैं ऐसा नहीं मानता। कानून मंत्री ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं। न्याय की प्रक्रिया से सबको गुजरना पड़ेगा। स्पेशल कोर्ट इसलिए बनता है कि विशेष घटना पर न्याय मिले। न्याय की प्रक्रिया से नहीं गुजरेंगे तो न्याय बाधित होता है।
विज्ञापन
भारतीय न्याय संहिता में सुधार को लेकर अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय संहिता पर काफी चर्चा हुई है। अंग्रेजो के जमाने में बने कानून में बदलाव किया गया है। हम नए कानून लेकर आए। इस पर चर्चा भी हुई है। अगर कोई सुझाव मिलेगा तो सरकार संवेदनशील है और उसमें सुधार करेगी। न्याय में देरी मिलने के सवाल पर कानून मंत्री ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को हमने एक विश्लेषण दिया है। लंबित केसों का आयुवार विश्लेषण किया जाए। इसके बाद पुराने मामलों को निपटाया जाए तो नए केस भी तेजी से सुलझेंगे।