केंद्र सरकार ने बुधवार को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (एमपीलैड्स) निधि फिर से बहाल कर दी है। यह निधि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए बचे हुए हिस्से के लिए बहाल किया गया है और 2025-26 तक जारी रहेगी। 2021-22 के लिए प्रत्येक सांसद को 2-2 करोड़ रुपये की किस्त आवंटित की जाएगी। इसके बाद सांसदों को हर साल पांच करोड़ की राशि मिलेगी। उन्हें यह राशि ढाई-ढाई करोड़ की दो किस्तों में जारी की जाएंगी।
दरअसल, सांसद निधि पर कोविड-19 महामारी की वजह से रोक लगी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, पिछले साल अप्रैल में सरकार ने कोरोना महामारी की वजह से 2020-21 और 2021-22 की सांसद निधि पर रोक लगाते हुए कहा था कि इसका उपयोग महामारी से निपटने और चिकित्सकीय सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा।
सरकार ने भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को 2014-15 से 2020-21 तक कपास के सात सत्रों के लिए 17,408.85 करोड़ रुपये के ‘प्रतिबद्ध मूल्य समर्थन’ को मंजूरी दे दी। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने यह फैसला लिया। सीसीईए ने कपास के सत्र (अक्तूबर-सितंबर) 2014-15 से 2020-21 के दौरान कपास के लिए एमएसपी संचालन के तहत नुकसान की भरपाई के लिए खर्च की भी मंजूरी दे दी है।
सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सीसीआई और अधिकृत एजेंसियों ने 2019-20 में कपास की 123 लाख गांठ और 2020-21 में 100 लाख गांठ की खरीद की। वार्षिक उत्पादन 350-360 लाख गांठ होने का अनुमान है। एक दूसरे फैसले में मंत्रिमंडल ने जूट वर्ष 2021-22 के लिए जूट पैकेजिंग सामग्री के लिए आरक्षण संबंधी मानदंडों को मंजूरी दे दी। इस फैसले से जूट उद्योग से जुड़े 3,70,000 मजदूरों को राहत मिलेगी।