बताया जा रहा है कि समिझा ने रविवार (21 मार्च) को अपने कुछ लॉटरी कस्टमर्स को फोन किया। उन्होंने कहा कि 12 टिकट अभी बिके नहीं हैं। अगर वे लेना चाहें तो ले सकते हैं। ऐसे में चंद्रन ने समिझा से कहा कि वह एसडी 31642 नंबर वाला टिकट उनके लिए रोक दें, जिसके लिए 200 रुपये वह बाद में दे देंगे।
उधार वाले टिकट पर लगा जैकपॉट
बता दें कि चंद्रन ने जो टिकट उधार लिया, उस पर छह करोड़ रुपये का जैकपॉट लग गया। समिझा को रविवार शाम ही पता लग गया कि उनके पास मौजूद एक टिकट पर पहला इनाम निकला है। समिझा ने देखा कि यह टिकट चंद्रन ने रुकवाया था। ऐसे में वह तत्काल उनके घर गईं और 200 रुपये लेकर टिकट उनके हवाले कर दिया।
चंद्रन, उनकी पत्नी लीला, दोनों बेटियां और बेटा समिझा की ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं। बता दें कि चंद्रन कीझमाडु डॉन बॉस्को स्कूल में माली हैं। चंद्रन के मुताबिक, वह कई साल से लॉटरी टिकट खरीद रहे थे। कुछ छोटे पुरस्कार निकले, लेकिन इतना बड़ा जैकपॉट पहली बार मिला।
समिझा ने कही यह बात
समिझा ने बताया कि लॉटरी का टिकट मैंने उसके विजेता के हवाले कर दिया, क्योंकि वह टिकट बिक चुका था। उन्होंने बताया कि मेरे पास काफी लोग कॉल कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कॉल्स में लोग इसे ईमानदारी की मिसाल बता रहे हैं।