सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व और मौजूदा सांसदों व विधायकों के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच पूरी नहीं होने पर गंभीर चिंता और नाखुशी जताई है। शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि जांच को तेजी और समय से पूरा करने के लिए यदि उन्हें ज्यादा लोग व संसाधन की जरूरत है तो उसकी व्यवस्था करें।
चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि कुछ कीजिए और सांसदों-विधायकों के मामलों में जांच को तेजी से पूरा करने की कोशिश करें। पीठ ने कहा कि यदि मामले को बंद करना हो, तो इसका निर्णय करें और यदि जारी रखना है तो वह भी बताएं। सुप्रीम कोर्ट भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें दागी विधायकों व सांसदों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने व जांच तेजी से पूरा करने के लिए विशेष अदालतों के गठन के निर्देश देने की मांग की गई है।
इससे पहले न्यायमित्र व वकील विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मौजूदा और पूर्व सांसदों विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के आंकड़े चौंकाने और परेशान करने वाले हैं। उनके खिलाफ मामलों में तेजी से जांच और ट्रायल जरूरी है। हंसारिया ने कहा था कि इनके 50 फीसदी मामले पिछले 10 सालों से लंबित हैं।