सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा, दिवालिया कानून के तहत किसी तरह की नई कार्यवाही को रोकने वाली मोरेटोरियम व्यवस्था सिर्फ कारपोरेट देनदार कंपनियों के लिए है, यह उसके प्रवर्तकों पर लागू नहीं होती।
बिल्डर और घर खरीदारों के एक विवाद पर आए फैसले में शीर्ष अदालत की इस टिप्पणी के अनुसार कंपनी और उसके प्रवर्तक अलग अलग हैं और मोरेटोरियम सुविधा का लाभ प्रवर्तक नहीं उठा सकते।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हीमा कोहली की पीठ ने इस साल की शुरुआत में दिए एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा, इस अदालत ने कहा था कि कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कोई भी कार्यवाही आईबीसी की धारा 14 के अंतर्गत मोरेटोरियम के प्रावधान के हिसाब से होगी। उस आदेश में ही स्पष्ट किया गया था कि मोरेटोरियम की राहत सिर्फ देनदार कंपनी के लिए है उसके प्रवर्तकों के लिए नहीं।