सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के संवैधानिक प्रावधानों को चुनौती दी गई है। इस याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम के अनुसार एक महिला को तब भी मातृत्व अवकाश लेने का अधिकार है अगर उसने तीन महीने से कम आयु के बच्चे को वैध तरीके से गोद लिया है।
इस जनहित याचिका में मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 5(4) को भेदभावपूर्ण बताया है। इसे लेकर न्यायाधीश एसए नजीर और कृष्ण मुरारी की पीठ ने कानून एवं न्याय मंत्रालय और महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय को नोटिस जारी किया और इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका कर्नाटक निवासी हंसानंदिनी नांदुड़ी ने दाखिल की है।
याचिका में कहा गया है कि गोद लेने वाली माताओं को (तीन माह से कम आयु के बच्चे को गोद सेने वाली) 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाता है जबकि जैविक माताओं को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता है। यह पूरी तरह से मनमाना और भेदभावपूर्ण है। याचिका में दावा किया गया है कि इस कानून का यह प्रावधान संविधान के भाग 3 की बुनियादी कसौटी पर भी खरा नहीं उतरता है।