सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर उस रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें सीबीआई को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की फाइल नोटिंग, आंतरिक पत्राचार, कानूनी राय सहित अन्य रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या हमें इसलिए उनकी याचिका सुननी चाहिए कि वह पूर्व मंत्री हैं?
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर विचार करना उचित नहीं होगा। पीठ ने देशमुख को सक्षम अदालत के पास जाने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई की शुरुआत में पीठ के समक्ष कहा कि शुरू में अदालत इस धारणा पर आगे बढ़ी कि एक प्रारंभिक रिपोर्ट थी, जिसमें कहा गया था कि एक संज्ञेय अपराध किया गया था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। प्रारंभिक रिपोर्ट में वास्तव में संज्ञेय अपराध किए जाने का रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।