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सहारा को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, वापस मिला ऐंबी वैली का संचालन

Mon, 16 Jul 2018 08:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुब्रत रॉय - फोटो : अमर उजाला
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सहारा को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी। न्यायालय ने ऐंबी वैली का संचालन वापस सहारा इंडिया परिवार को सौंपते हुए इससे रिसीवर तथा ऑफिशियल लिक्विडेटर को हटा लिया है। शीर्ष न्यायालय ने ऐंबी वैली से संबंधित समस्त दस्तावेज व कागजात सहारा को वापस देने का भी आदेश दिया है। सहारा समूह द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सहारा-सेबी प्रकरण की बृहस्पतिवार को सम्पन्न हुई सुनवाई के आधार पर शुक्रवार को यह आदेश जारी किया गया। 10,600 एकड़ क्षेत्रफल से अधिक भू-भाग में फैली ऐंबी वैली भारत की पहली हिल सिटी है।

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सहारा की ओर से पेश वकील विकास सिंह ने कहा कि सहारा ने हमेशा न्यायालय में यही कहा है कि उसने अपने निवेशकों का रिफंड कर दिया है। जो राशि सहारा ने सहारा-सेबी खाते में जमा कराई है, वह एक देनदारी के प्रति दूसरी बार अदायगी है। इस तरह सेबी के पास अब सहारा के लगभग 20,000 करोड़ रुपये हैं। उन्होंने कहा कि जब न्यायालय ने सेबी को निवेशकों के सत्यापन का निर्देश दिया है, फिर सेबी इस काम को अंजाम क्यों नहीं दे रही है।

सहारा की इस याचिका पर कि उसके निदेशकों पर लगी पुलिस की निजी सुरक्षा हटा ली जाए, सेबी ने आपत्ति प्रकट की और कहा कि चूंकि वे परोल पर हैं, इसलिए सुरक्षा रहनी चाहिए। सेबी के इस तर्क  की प्रतिक्रिया में पीठ ने कहा कि व्यावहारिक बात करिए और जब सहारा ने 20,000 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं, तो आपको क्या लगता है कि वे कुछ हजार करोड़ रुपयों के लिए भाग जाएंगे।
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सहारा के वकील गौतम अवस्थी ने बताया कि कुछ महीने पूर्व सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देशित किया था कि यदि सहारा समूह 750 करोड़ रुपये की धनराशि जमा करा देता है तो कोर्ट ऐंबी वैली का सम्पूर्ण नियंत्रण सहारा को वापस देने पर विचार कर सकता है। सहारा समूह ने सूचित किया कि दो फर्म साई रिदम रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और प्राइम डाउन टाउन रीयल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड सहारा की मुंबई के निकट वसई स्थित संपत्ति को लगभग 1,000 करोड़ रुपये में खरीदने को तैयार हैं तथा उक्त धनराशि सहारा-सेबी खाते में जमा करा दी जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने इसका संज्ञान लेते हुए ऐंबी वैली से रिसीवर और ऑफि शियल लिक्विडेटर हटा लिए हैं और ऐंबी वैली का नियंत्रण सहारा इंडिया परिवार को फिर से दे दिया है। उसके बाद पीठ ने दोनों फर्म को 99 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने व शेष राशि को जमा कराने की समय सीमा निर्धारित की। 

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