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प्रवर्तन निदेशालय के अंतरिम निदेशक बने संजय मिश्रा, 3 माह के लिए सरकार ने सौंपी जिम्मेदारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 27 Oct 2018 01:28 PM IST
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केंद्र सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी संजय मिश्रा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का निदेशक नियुक्त किया है। मिश्रा को तीन महीने के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है सीबीआई में चल रही उथल-पुथल के चलते सरकार ने निदेशालय में लघु अवधि के लिए अंतरिम निदेशक बनाया है। इस तीन महीने के भीतर नए निदेशक की नियुक्ति की जाएगी।  



आयकर विभाग के आयुक्त के पद पर काम कर रहे 1984 बैच के आईआरएस अधिकारी मिश्रा ईडी के मौजूदा निदेशक करनाल सिंह की जगह लेंगे। सिंह का आज अंतिम कार्यदिवस है और रविवार को वह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने इस पद पर तीन साल से भी ज्यादा समय तक अपनी सेवाएं दीं। नियुक्ति मामलों की कैबिनेट समिति (एसीसी) ने मिश्रा को ईडी के निदेशक का अतिरिक्त चार्ज तीन माह के लिए सौंपा है। जब तक कि स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो जाती है। 


एसीसी के यह भी कहा है कि मिश्रा की नियुक्ति वित्तीय जांच एजेंसी में प्रमुख विशेष निदेशक के तौर पर की गई है। मिश्रा ऐसे दूसरे अधिकारी हैं जो प्रमुख विशेष निदेशक बने हैं, एजेंसी में यह नया पद बना है जिसमें पहली नियुक्ति 1988 बैच के आईआरएस अधिकारी सीमांचल दास की हुई थी। आयकर विभाग के सूत्रों ने कहा कि मिश्रा एनडीटीवी के खिलाफ चल रहे जांच में शामिल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने ही नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार के खिलाफ जांच को गाइड किया था। मिश्रा ने अहमदाबाद में भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा गृह मंत्रालय और ईडी में भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया है।  


वर्तमान ईडी प्रमुख करनाल सिंह को निर्धारित अवधि दो साल के लिए 27 अक्टूबर, 2016 में कार्यभार सौंपा गया था। उनकी नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आदेश के अनुपालन के अनुसार निर्धारित अवधि के लिए की गई थी। उनके नेतृत्व में कई अहम मामलों की जांच पीएमएलएल और फेमा के तहत की गई।


इससे पहले चर्चा चल रही थी कि करनाल सिंह के कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में सीबीआई में जो हुआ उसे देखते हुए सरकार ने यह फैसला लेना उचित नहीं समझा। सूत्रों ने बताया कि करनाल सिंह ने हटने का फैसला कर लिया था। ईडी प्रमुख बनने से पहले उनको इस पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था और इस दौरान तीन बार उनके कार्यकाल को बढ़ाया गया। 


सूत्र बताते हैं कि इस दौरान गुजरात कैडर के 1985 बैच के आईएस अधिकारी जीसी मुर्मू को भी ईडी के निदेशक बनाए जाने पर विमर्श हुआ। लेकिन आईएस अधिकारी ने इस पद पर सेवाएं देने से इंकार कर दिया, क्योंकि ईडी निदेशक का पद सरकार में अतिरिक्त सचिव रैंक के पद के बराबर होता है। माना जा रहा है कि अब वह राजस्व सचिव के पद की दौड़ में शामिल हैं। इसी बीच सीबीआई में उथल-पुथल शुरू हो गई और सरकार ने ईडी में निदेशक के पद पर नियुक्ति करने में कोई जल्दबाजी नहीं करने का निर्णय लिया।  

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