कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश ने खूब तबाई मचाई। देश में चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। अस्पतालों में बेड की कमी तो लोगों को ऑक्सीजन मिलना काफी मुश्किल हो रहा था। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में कम पुरुष अस्पताल में भर्ती हुए, हालांकि इस दौरान मौतों का आंकड़ा तीन फीसद से अधिक बढ़ गया था।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के विशेषज्ञों ने दोनों लहरों की क्लीनिकल प्रोफाइल देख कर ही सामने पूरी रिसर्च रखी।
युवाओं को दूसरी लहर में वायरस ने बनाया अपना शिकार
इस स्टडी के अनुसार, पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में युवा सबसे ज्यादा संक्रमित हुए हैं। हालांकि, दोनों ही लहर में अस्पताल में भर्ती होने वाले 70 फीसदी संक्रमितों की उम्र 40 से ज्यादा थी।
यह स्टडी सिर्फ इसलिए की गई ताकि लोगों को पहली और दूसरी लहर के बीच अंतर समझ आ सके। यह सारा डेटा नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री से लिया गया। इस स्टडी में देशभर के 41 अस्पतालों को शामिल किया गया।
इस स्टडी में पहली लहर का डेटा 1 सितंबर से 31 जनवरी 2020 तक का लिया गया। जबकि दूसरी लहर का डेटा 1 फरवरी से 11 मई 2021 तक के बीच का लिया गया।
20 साल के कम उम्र के युवा कम चपेट में आए
अध्ययन में कहा गया कि सिर्फ 20 साल से कम उम्र के लोगों को छोड़कर दूसरी लहर में सभी उम्र के लोगों की मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। साथ ही बताया कि दूसरी लहर में 20 साल से कम और 20-39 की उम्र के बीच के लोग सबसे ज्यादा अस्पताल में एडमिट हुए। ज्यादातर लोगों के सामान्य बुखार ही था। और वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावति वे युवा हुए जो पहले से कोई बीमारी थी।
भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर में उच्च मृत्यु दर दर्ज की गई
भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर पहले की तुलना में थोड़ा अलग थी। दूसरी लहर में 20 साल से कम उम्र के लोगों को छोड़कर सभी आयु समूह वाले लोगों में उच्च मृत्यु दर दर्ज की गई थी और अधिक लोगों को सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई थी तथा उन्हें पूरक ऑक्सीजन एवं यांत्रिक वेंटिलेशन की जरूरत थी। यह जानकारी एक अध्ययन में सामने आई है।
अध्ययन रिपोर्ट ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में प्रकाशित हुई है जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के विशेषज्ञों द्वारा अंजाम दिया गया।