कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल के बिजली संयंत्रों में औसतन चार से सात दिन के कोयले का स्टॉक बचा है। कई संयंत्रों में स्टॉक दो दिन का बताया जा रहा है। इन राज्यों ने सप्लाई में जल्द सुधार न आने पर संकट बढ़ने का अंदेशा जताया है। सप्लाई की कमी से उत्पादन भी नहीं बढ़ पा रहा है।
इन इकाइयों में उत्पादन ठप
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की छह अक्तूबर 2021 की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार कोयले की कमी से 10 बिजली संयंत्रों की 36 यूनिट कम से कम 15 दिन से बंद हैं। इनमें गुरु हरगोबिंद, रोपण, सूरतगढ़, नवापारा, सलाया, नासिक, भुसावल, उडुपी, सागर्दिघी और हिरनमयी के प्लांट शामिल हैं।
पंजाब में बिजली उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित होने के कारण शहरों में सोमवार को पांच घंटे के कट लगे, वहीं किसानों को भी छह घंटे की बजाय केवल तीन घंटे ही बिजली मिली। दशहरे तक सप्लाई प्रभावित रहेगी।
हरियाणा : कोयले की आपूर्ति आधी
हरियाणा में इस समय 8 रैक कोयला रोजाना जरूरत है, लेकिन मात्र 4 रैक ही मिल रहे हैं। प्लांटों में स्टॉक 25 दिन से घटकर मात्र 4 दिन का रह गया है। इसके बावजूद प्रदेश में फिलहाल बिजली संकट नहीं है।
कोयले की कमी के कारण यूपी में रविवार को 5250 मेगावाट बिजली का कम उत्पादन हुआ, जिससे शहरों में भी अघोषित कटौती बढ़ा दी गई है। कुछ संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति हुई है, पर वहां अब भी एक या दो दिन से ज्यादा का कोयला नहीं है। कोयले के घटते भंडार ने बिजली उत्पादन की रफ्तार धीमी कर दी है।
रविवार को सरकार के संयंत्रों ने 1100 मेगावाट कम उत्पादन किया। निजी कंपनियों के संयंत्रों ने 2550 मेगावाट तथा एनटीपीसी ने 1600 मेगावाट कम बिजली उत्पादित की। औसतन प्रदेश में रोज बीस हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है।