पूर्व डिप्टी सीएम एवं जजपा नेता दुष्यंत चौटाला कहते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो जजपा उसे बाहर से समर्थन देगी। प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले बताते हैं, समर्थन लेने देने की कहानी, अभी खत्म नहीं हुई है। हरियाणा में अभी हिसाब खुलना बाकी है। भाजपा सरकार गिराने के चक्कर में कहीं कांग्रेस और जजपा में तो सेंध नहीं लग रही। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस बाबत इशारा कर दिया है कि हमारे संपर्क में भी विधायक हैं।
'जजपा' विधायकों के समर्थन से सरकार का गठन
हरियाणा में कांग्रेस और जजपा, दोनों दलों को एक दूसरे पर भरोसा नहीं है। हालांकि, पिछले वर्ष पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था, विधानसभा चुनाव में एक समान विचारधारा वाले दल साथ आ सकते हैं। उनसे जजपा के साथ किसी तरह के गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया था। उस वक्त तक जजपा, भाजपा सरकार में शामिल थी।
गत मार्च में भाजपा ने जजपा के साथ गठबंधन तोड़ने की घोषणा की थी। मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद से हटा कर नायब सैनी को सीएम बनाया गया था। उस वक्त भाजपा सरकार ने विधानसभा में विश्वासमत हासिल किया था। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की थी। सरकार के गठन के लिए 45 विधायकों का समर्थन चाहिए था। तब भाजपा ने जननायक जनता पार्टी 'जजपा' के दस विधायकों के समर्थन से सरकार का गठन किया था। हालांकि भाजपा, छह निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा करती रही है।
हरियाणा लोकहित पार्टी के एक विधायक ने भी सरकार को समर्थन दिया था। कांग्रेस के पास 31 विधायक थे। बाद में कुलदीप बिश्नोई के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 30 रह गई। दूसरी तरफ बिश्नोई, भाजपा में शामिल हो गए। उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज कराई। इससे भाजपा विधायकों की संख्या 41 पर पहुंच गई।
फ्लोर टेस्ट से पता चलेगा, बहुमत है या नहीं
मौजूदा समय में हरियाणा विधानसभा के सदस्यों की संख्या 88 है। वजह, पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और कैबिनेट मंत्री रणजीत चौटाला विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। ये दोनों नेता, लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता कह चुके हैं कि छह माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। कांग्रेस या कोई दूसरी पार्टी, नंबर गेम को लेकर कुछ भी दावा करे, ये तो फ्लोर टेस्ट से पता चलेगा कि किसके पास कितना नंबर है। राज्यपाल की तरफ से इस बाबत कोई निर्णय लिया जा सकता है। खास बात है कि भूपेंद्र हुड्डा दावा कर रहे हैं कि भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है। दूसरी तरफ, जजपा नेता दुष्यंत चौटाला कह रहे हैं, कांग्रेस पार्टी चाहे तो अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। जजपा, उसे बाहर से समर्थन दे देगी।
लग सकती है कांग्रेस और जजपा में सेंध
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता, जो पूर्व में पार्टी का अध्यक्ष पद संभाल चुके हैं, उनके करीबी बताते हैं, चुनाव के मौके पर विधायकों की पाला बदली चलती रहती है। इससे सरकार को कोई खतरा नहीं है। जब फ्लोर टेस्ट होगा, तो पता चल जाएगा कि किसके पास कितने नंबर हैं। ऐसा भी तो संभव है कि कांग्रेस और जजपा में ही सेंध लग जाए। हरियाणा में विधानसभा चुनाव, सितंबर या अक्तूबर में हैं। इस वजह से विधायक पाला बदली कर रहे हैं। उन्हें जहां से भी टिकट का भरोसा मिलता है, वे उसी पार्टी को समर्थन दे देते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर की बात को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा है कि कई एमएलए हमारे भी संपर्क में हैं। कांग्रेस और जजपा में सभी मौजूदा विधायकों को टिकट मिलेगा, ऐसा भी नहीं है। ऐसे माहौल में कल, कौन किसके पाले में खड़ा होगा, कहा नहीं जा सकता।
दुष्यंत बोले, हॉर्स ट्रेडिंग से इनकार नहीं
गुरुवार को दुष्यंत चौटाला ने कहा, संविधान के अनुसार, राज्यपाल फ्लोर टेस्ट कराएं। इस बाबत राज्यपाल को लिखा गया है। मौजूदा समय में 88 विधायकों का सदन है। सरकार को बने रहने के लिए 44 विधायक चाहिए। इस स्थिति में हॉर्स ट्रेडिंग से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछला अविश्वास प्रस्ताव खट्टर सरकार में लाया गया था। अब नायब सैनी की सरकार है। नई सरकार है। इसके खिलाफ फ्लोर टेस्ट हो सकता है या नहीं, राज्यपाल इस बाबत फैसला ले सकते हैं। राज्यपाल को देखना है कि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है या नहीं। अगर बहुमत नहीं है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। नायब सैनी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है, तो जजपा उसका समर्थन करेगी।
सरकार के पास 47 विधायकों के समर्थन का दावा
विधानसभा में 88 में से 40 विधायक भाजपा के हैं। कांग्रेस के पास 30 एमएलए हैं। जजपा के दस विधायक हैं। इनेलो और हरियाणा लोकहित पार्टी का एक एक विधायक है। छह सदस्य निर्दलीय विधायक हैं। इनमें से तीन विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। दो भाजपा के साथ बताए जाते हैं। महम से विधायक बलराज कुंडू भी सरकार के खिलाफ रहे हैं। दो निर्दलीय और हलोपा का एक एमएलए, उनका समर्थन भाजपा के पास है। हालांकि भाजपा यहां पर अपने सभी पत्ते नहीं खोल रही है। मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रेय के अनुसार, प्रदेश सरकार अल्पमत में नहीं है। सरकार को 47 विधायकों का समर्थन हासिल है। विधानसभा में भाजपा के 40 विधायक हैं। दो निर्दलीय एमएलए, राकेश दौलताबाद और नयनपाल रावत का समर्थन भी भाजपा के पास है। हलोपा विधायक गोपाल कांडा, सरकार के समर्थन में हैं। भाजपा ने जजपा के नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम, टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली, नरवाना के विधायक रामनिवास सुरजा खेड़ा और जोगीराम सिहाग के समर्थन का भी दावा किया है।
कुछ लोगों की इच्छाएं पूरी कर रही कांग्रेस
प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कह चुके हैं, विधायकों की कुछ इच्छाएं होती हैं। कांग्रेस कुछ लोगों की इच्छाओं को पूरा करने में लगी हुई है। अब कांग्रेस को जनता की इच्छाओं से कोई लेना-देना नहीं है। मंगलवार को रोहतक में भाजपा को समर्थन देने वाले तीन निर्दलीय विधायक, दादरी से सोमबीर सांगवान, पूंडरी से रणधीर गोलन और नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंधर ने भूपेंद्र हुड्ड की उपस्थिति में कांग्रेस के समर्थन का एलान किया था। जजपा के दो विधायक, ईश्वर सिंह और रामकरण काला, कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। जजपा के दस में से अधिकांश विधायक अब इधर-उधर हो चुके हैं या होने की कोशिश में हैं। केवल दुष्यंत चौटाला, नैना चौटाला, अमरजीत ढांढा और अनूप धानक ही एकजुट बताए जाते हैं। हालांकि भाजपा ने जजपा विधायक रामकुमार गौतम के समर्थन का दावा किया है, लेकिन गौतम ने खुद इस बाबत कोई एलान नहीं किया है।