फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंताजनक : सुबूतों के अभाव में प्रतिदिन यौन शोषण के शिकार चार बच्चों को नहीं मिल पाता न्याय

Tue, 09 Mar 2021 03:29 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
विज्ञापन

कड़े कानून हैं, मगर उन पर उसी कड़ाई से अमल नहीं हो रहा। आंकड़े जो सामने आए हैं, वे बता रहे हैं कि बचपन अब भी असुरक्षित है। यौन शोषण के शिकार बच्चों में से औसतन चार को प्रतिदिन न्याय नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि पुलिस सुबूतों के अभाव में केस ही बंद कर देती है।

विज्ञापन


कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) की ओर से पोक्सो एक्ट- 2012 के तहत दर्ज केसों और उनके निपटारे के तरीके के अध्ययन के बाद यह तथ्य उभर कर सामने आया। ये आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) में साल 2017 और 2019 के बीच दर्ज केसों के अध्ययन के आधार पर जुटाए गए। इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केमौके पर जारी किया गया।

अध्ययन में यह बात उभर कर सामने आई कि वर्ष 2017 और 2019 के बीच केसों को बंद करने की संख्या बढ़ गई। पुलिस ने केसों को जांच केबाद सुबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बंद कर दिया और आरोप पत्र दाखिल नहीं किए।
विज्ञापन


अध्ययन में बताया गया कि देश में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण की घटनाओं में वृद्धि हुई है। भले ही देश में बच्चों की सुरक्षा के मकसद से पोक्सो कानून लागू किया गया मगर इस पर अमल की रफ्तार बेहद धीमी और असंतोषजनक है। केएससीएफ केमुताबिक 2019 तक  करीब 89 फीसदी मामलों को न्याय का इंतजार था।

51 फीसदी मामले यूपी, हरियाणा, दिल्ली समेत पांच राज्यों के
पोक्सो के तहत करीब 51 फीसदी मामले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में दर्ज किए गए। जबकि सजा मिलने का प्रतिशत 30 से 64 फीसदी के बीच है। ज्यादातर पीड़ित चूंकि  कमजोर तबके से आते हैं उन पर आसानी से दबाव बनाकर केस बंद करा दिए जाते हैं।

सालाना 3000 मामले कोर्ट ही नहीं पहुंचते
पोक्सो के तहत दर्ज सालाना करीब 3000 मामले जांच केबाद कोर्ट तक नहीं पहुंचते और प्रतिदिन चार पीड़ित बच्चों को न्याय नहीं मिल पाता और उनके केस बंद कर दिए जाते हैं। 2017 और 2018 के मुकाबले 2019 में करीब 43 फीसदी मामले बंद किए गए।

केस बंद होने की वजह
अध्ययन में बताया गया है कि पोक्सो के तहत केस दर्ज होने के बावजूद सबूतों और साक्ष्यों के अभाव में मामला ट्रायल के लिए कोर्ट तक नहीं पहुंच पाता।
एनसीआरबी केआंकड़ों के अनुसार बंद मामलों में पुलिस ने पर्याप्त सबूतों केअभाव को कारण माना है।

जिलों में बाल शोषण निगरानी यूनिट बनाने की दरकार
अध्ययन में बताया गया है कि दर्ज होने वाले मामलों और उनके निपटारे के अंतर को कम करने केलिए सभी पोक्सो के तहत दर्ज मामले की निगरानी पुलिस अधीक्षक या डीएसपी स्तर केअधिकारी द्वारा होना चाहिए।

इसके अलावा सभी जिले में बाल यौन शोषण मामले की निगरानी के लिए अलग यूनिट बनाने की सिफारिश की गई है। इन यूनिट में ट्रेंड पुलिसकर्मी हों। साथ ही सुनवाई के लिए त्वरित अदालतों की संख्या बढ़ाई जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें