तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में डीएमके ने कांग्रेस को 25 और अन्नाद्रमुक ने भाजपा को 20 सीटें देने का फैसला किया है। दोनों द्रमुक पार्टियां खुद 180-180 सीटों पर लड़ेंगी।
कम सीटें मिलने के कारण एक समय कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन लगभग टूटने के कगार पर था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अलागिरी के अपमानित महसूस करने पर फूट-फूट कर रोने की खबरें भी आई थी। लेकिन अलागिरी ने सोमवार को 25 सीटें मिलने पर संतोष जताया।
द्रमुक नेताओं का कहना था कि कांग्रेस की सफलता की दर बहुत कम है। 2011 में वह 63 सीटों में 9 प्रतिशत वोट लेकर केवल 5 सीट जीती थी। यानी उसकी सफलता की दर महज आठ प्रतिशत थी। 2016 के चुनाव में उसने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा और वह 6.4 प्रतिशत वोट पाकर 8 सीटें ही जीत पाई। यानी उसकी सफलता की दर 20 प्रतिशत थी।
द्रमुक ने 54 सीटें अपने सहयोगियों को लड़ने को दी हैं। इनमें एमडीएमके, वीसीके, सीपीआई और सीपीएम को छह-छह सीटें जबकि आईयूएमएल को तीन और एमकेके को दो सीटें दी गई हैं।
वही अन्नाद्रमुक ने भाजपा को 20 और पीएमके को 23 सीटें दी हैं। कैप्टन विजयकांत की डीएमडीके से उनकी बातचीत अभी चल रही है। हालांकि उन्हें 10 या 11 सीटों से अधिक दिए जाने की संभावना नहीं है।