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LS Polls 2024: कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी का आरोप, पार्टी ने मुझे सबसे पहले 2017 में धोखा दिया था

Sat, 11 May 2024 10:46 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत

सार

कुंभानी ने कहा कि कांग्रेस नेता मुझ पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं। जबिक कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनावों में मुझे सबसे पहले धोखा दिया जब सूरत की कामरेज विधानसभा सीट से मेरा टिकट आखिरी समय में रद्द कर दिया गया था।
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नीलेश कुंभानी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस के निलंबित नेता नीलेश कुंभानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 2017 में सबसे पहले धोखा दिया था। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल और पार्टी के राजकोट लोकसभा उम्मीदवार परेश धनानी के प्रति सम्मान के कारण इतने दिनों तक चुप रहे। कुंभानी का नामांकन फॉर्म विसंगतियों के कारण खारिज होने के बाद ही भाजपा ने गुजरात की सूरत लोकसभा सीट पर निर्विरोध जीती थी।

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कुंभानी ने कहा कि कांग्रेस नेता मुझ पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं। जबिक कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनावों में मुझे सबसे पहले धोखा दिया जब सूरत की कामरेज विधानसभा सीट से मेरा टिकट आखिरी समय में रद्द कर दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि वैसे तो आप और कांग्रेस इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन जब मैं आप नेताओं के साथ प्रचार करता था तो कांग्रेस के नेताओं ने आपत्ति जताई थी।

सूरत लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल के निर्विरोध चुने जाने के बाद कांग्रेस ने कुंभानी को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। कांग्रेस की ओऱ से जारी बयान में कहा गया था कि पार्टी की अनुशासनात्मक समिति द्वारा कुंभानी को लंबी चर्चा के बाद निलंबित करने कै फैसला लिया गया है। बैठक के बाद यह निष्कर्ष निकला कि कुंभानी का नामांकन फॉर्म उनकी ओर से की गई घोर लापरवाही या भाजपा के साथ मिलीभगत के कारण खारिज किया गया। 

कांग्रेस नेतृत्व पर मदद नहीं करने का आरोप
निलंबन के बाद कुंभानी ने दावा किया था कि कांग्रेस पार्टी में उनके सहयोगियों ने प्रचार के दौरान मदद नहीं की। एक वीडियो संदेश में कुंभानी ने कहा कि उन्हें अतीत में भाजपा से प्रस्ताव मिले थे, लेकिन इतने वर्षों तक कांग्रेस के साथ रहने का फैसला लिया। चुनाव हारने के बावजूद वराछा क्षेत्र में अपना कार्यालय बंद नहीं किया। उन्होंने कहा, जब वे नामांकन फॉर्म खारिज होने के संबंध में उच्च न्यायालय में अपील करने अहमदाबाद आ रहे थे, तो कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सूरत में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

21 अप्रैल को खारिज किया गया था नामांकन फॉर्म

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कुंभानी का नामांकन फॉर्म 21 अप्रैल को खारिज कर दिया गया। दावा किया गया था कि दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे। इसी आधार पर कांग्रेस के पास विकल्प के रूप में मौजूद सुरेश पादसाला का नामांकन पत्र भी खारिज कर दिया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर सौरभ पार्धी ने अपने आदेश में कहा है कि कुंभानी और पादसाला की तरफ से तीन नामांकन फॉर्म जमा किए गए थे। शुरुआती जांच में पाया गया कि प्रस्तावकों के हस्ताक्षर वास्तविक प्रतीत नहीं हुए। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुकेश दलाल को सूरत लोकसभा सीट से 22 अप्रैल को निर्विरोध चुना गया था, क्योंकि अन्य सभी उम्मीदवार नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन एक-एक करके मैदान से हट गए थे।

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