कांग्रेस के निलंबित नेता नीलेश कुंभानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 2017 में सबसे पहले धोखा दिया था। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल और पार्टी के राजकोट लोकसभा उम्मीदवार परेश धनानी के प्रति सम्मान के कारण इतने दिनों तक चुप रहे। कुंभानी का नामांकन फॉर्म विसंगतियों के कारण खारिज होने के बाद ही भाजपा ने गुजरात की सूरत लोकसभा सीट पर निर्विरोध जीती थी।
सूरत लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल के निर्विरोध चुने जाने के बाद कांग्रेस ने कुंभानी को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। कांग्रेस की ओऱ से जारी बयान में कहा गया था कि पार्टी की अनुशासनात्मक समिति द्वारा कुंभानी को लंबी चर्चा के बाद निलंबित करने कै फैसला लिया गया है। बैठक के बाद यह निष्कर्ष निकला कि कुंभानी का नामांकन फॉर्म उनकी ओर से की गई घोर लापरवाही या भाजपा के साथ मिलीभगत के कारण खारिज किया गया।
कांग्रेस नेतृत्व पर मदद नहीं करने का आरोप
निलंबन के बाद कुंभानी ने दावा किया था कि कांग्रेस पार्टी में उनके सहयोगियों ने प्रचार के दौरान मदद नहीं की। एक वीडियो संदेश में कुंभानी ने कहा कि उन्हें अतीत में भाजपा से प्रस्ताव मिले थे, लेकिन इतने वर्षों तक कांग्रेस के साथ रहने का फैसला लिया। चुनाव हारने के बावजूद वराछा क्षेत्र में अपना कार्यालय बंद नहीं किया। उन्होंने कहा, जब वे नामांकन फॉर्म खारिज होने के संबंध में उच्च न्यायालय में अपील करने अहमदाबाद आ रहे थे, तो कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सूरत में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
21 अप्रैल को खारिज किया गया था नामांकन फॉर्म