राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पांच शीर्ष नेताओं के खिलाफ बुधवार को आरोप पत्र दाखिल किया। एजेंसी ने बताया कि आरोपत्र माओवादियों की आतंकी योजनाओं और हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने के एक मामले में दायर किया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
एजेंसी के एक प्रवक्ता ने बताया कि झारखंड के रांची में एनआई की विशेष अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन की ओर से झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में अपनी हिंसक विचार का विस्तार करने और उसका प्रसार करने की आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में दायर यह पहला आरोप पत्र है।
उन्होंने बताया कि जिन पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपत्र दाखिल किया गया है। वे भाकपा (माओवादी) संगठन के अन्य शीर्ष नेताओं से संपर्क में थे और संगठन में लोगों की भर्ती, आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाने, हथियार और गोला-बारूद खरीदने और हथियारों को चलाने, आईईडी के निर्माण के लिए प्रशिक्षण ने देने में सक्रिय रूप से जुटे हुए थे।
अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने अपने मकसदों को हासिल करने के लिए जेल में बंद भाकपा (माओवादी) के सदस्यों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भी संपर्क किया था। जिन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनमें संगठन के पोलित ब्यूरो का सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा भी शामिल है। वह भाकपा (माओवादी) संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का नेतृत्व कर रहा था।
प्रवक्ता ने कहा कि प्रशांत बोस बिहार और झारखंड के सबसे बड़े माओवादी नेताओं में से एक है और उसे पिछले साल दस अगस्त को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ झारखंड के थानों में 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं। एक अन्य आरोपी नुनुचंद महतो उर्फ नुनूलाल महतो है। वह संगठन का झारखंड में उप-जोनल कमांडर है और उसके खिलाफ साठ मामले दर्ज हैं। उसे प्रशांत बोस और दो अन्य आरोपियों दुर्योधन प्रसाद महतो उर्फ मिथिलेश सिंह और कृष्ण हांसदा उर्फ सौरव दा के साथ गिरफ्तार किया गया था।