JDU के पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान ने इसको लेकर बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, 'हमारी पार्टी के नगालैंड राज्य अध्यक्ष ने जद (यू) के केंद्रीय नेतृत्व से परामर्श किए बिना नगालैंड के मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र दिया है जो उच्च अनुशासनहीनता और मनमाना कदम है। इसलिए जद (यू) ने नगालैंड में पार्टी की राज्य समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।'
नगालैंड में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के साथ बड़ा खेल हो गया। यहां विधानसभा चुनाव जीतने वाले जेडीयू के एकमात्र विधायक ने बिना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पूछे भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को समर्थन दे दिया। इसपर अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेडीयू की राज्य इकाई को पूरी तरह से भंग कर दिया है।
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JDU के पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान ने इसको लेकर बयान जारी किया। इसमें उन्होंने लिखा, 'हमारी पार्टी के नगालैंड राज्य अध्यक्ष ने जद (यू) के केंद्रीय नेतृत्व से परामर्श किए बिना नगालैंड के मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र दिया है जो उच्च अनुशासनहीनता और मनमाना कदम है। इसलिए जद (यू) ने नगालैंड में पार्टी की राज्य समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।'
कई पार्टियों ने जीत हासिल की है
इस बार नगालैंड में सबसे ज्यादा राजनीतिक दलों ने जीत हासिल की है। दो मार्च को चुनाव के नतीजे आए थे। आंकड़ों के अनुसार, NDPP को 25, भाजपा को 12 सीटों पर जीत मिली थी। इन दोनों पार्टियों ने चुनाव से पहले ही गठबंधन कर लिया था। एनसीपी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इनके सात सदस्यों ने चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके अलावा एनपीपी के पांच, चार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास), एनपीएफ, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के दो-दो सदस्यों ने जीत हासिल की थी। जेडीयू के टिकट पर एक प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। ये पहली बार है जब इतने सारे राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की हो।