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केरल: एमएसएफ नेता ने अश्लील टिप्पणी पर खेद जताया, कहा- दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया

Thu, 26 Aug 2021 07:35 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

नवास ने कहा कि मैंने बैठक के दौरान दुर्भावनापूर्ण इरादे से एक भी शब्द नहीं कहा, जिसमें एक महिला कार्यकर्ता सहित लगभग 30 लोग शामिल थे। बैठक में भाग लेने वाले मेरे किसी भी सहयोगी को अगर मेरी बात से ठेस पहुंची हो तो मुझे उसका खेद है।
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पीके नवास - फोटो : साेशल मीडिया
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विस्तार
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मुस्लिम छात्र संघ (एमएसएफ) के एक शीर्ष नेता ने गुरुवार को अपनी अश्लील टिप्पणी पर खेद जताया। उन पर हाल ही में एक बैठक के दौरान संगठन की कुछ महिला सदस्यों के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने के आरोप लगे थे। हालांकि, खेद जताने के बाद भी वे अपने इस दावे पर अड़े रहे कि उन्होंने दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की छात्र शाखा एमएसएफ के अध्यक्ष पीके नवास ने एक फेसबुक पोस्ट के साथ इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। 
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उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एमएसएफ की हालिया राज्य समिति की बैठक के दौरान किसी के खिलाफ कोई व्यक्तिगत या लिंग-विशिष्ट टिप्पणी नहीं की, जैसा कि संगठन की महिला शाखा हरिता के नेताओं ने आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि मैंने बैठक के दौरान दुर्भावनापूर्ण इरादे से एक भी शब्द नहीं कहा, जिसमें एक महिला कार्यकर्ता सहित लगभग 30 लोग शामिल थे। बैठक में भाग लेने वाले मेरे किसी भी सहयोगी को अगर मेरी बात से ठेस पहुंची हो या फिर गलतफहमी हुई हो तो मुझे उसका खेद है। 

नवास ने कहा कि अगर बैठक के दौरान ही इस मुद्दे को उठाया गया होता या विरोध दर्ज कराया जाता तो वह इस गलतफहमी को तत्काल ही ठीक कर देते और जरूरत पड़ने पर माफी भी मांगते। उन्होंने अब तक इस विवाद पर प्रतिक्रिया इसलिए नहीं दी क्योंकि वह पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन नहीं करना चाहते थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब यह विवाद यहां हमेशा के लिए खत्म हो जाना चाहिए।
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बता दें कि हरिता नेताओं के एक समूह ने हाल ही में नवास सहित संगठन के कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ राज्य महिला आयोग में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि आईयूएमएल नेतृत्व दोषी के खिलाफ समय पर कोई कार्रवाई करने में विफल रहा, इसलिए न्याय के लिए आयोग के पास जाना पड़ा।
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