इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने आज भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में कहा कि मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री की जरुरतों के अनुसार पत्रकार भी तैयार किये जा सकेंगे।
दरअसल, 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर बोलते हुए डॉ जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कहीं भी मीडिया या पत्रकारिता शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेते हुए जनसंचार और पत्रकारिता शिक्षा के भविष्य के बारे में सोचना होगा।
डॉ जोशी ने कहा कि अख्तर अंसारी का एक शेर है, 'अब कहां हूं कहां नहीं हूं मैं, जिस जगह हूं वहां नहीं हूं मैं, कौन आवाज दे रहा है मुझे, कोई कह दो यहां नहीं हूं मैं।' यानी जो कहीं नहीं है, वो हर जगह है। जैसे शिक्षा नीति में मीडिया शब्द न होकर भी हर जगह है। उन्होंने कहा कि तकनीक ने मीडिया को भी बदल दिया है। आज स्कूलों में 3डी तकनीक से पढ़ाई हो रही है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्वाइंट 11 की चर्चा करते हुए हमें होलिस्टिक एजुकेशन पर ध्यान देना होगा। इस संदर्भ में अगर हम भारतीय संस्कृति की बात करें, तो प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा-क्रम का क्षेत्र बहुत व्यापक था। शिक्षा में कलाओं की शिक्षा भी अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती थीं और इनमें चौंसठ कलाएं महत्वपूर्ण हैं। अगर हम देखें तो ये कलाएं आज हमारे अत्याधुनिक समाज का हिस्सा हैं।
नई शिक्षा नीति है एक क्रांतिकारी कदम
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो गीता बामजेई ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रो बामजेई ने कहा कि अगर हम इस शिक्षा नीति को सही तरह से अपनाते हैं, तो ये नीति हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तरफ ले जाएगी। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति से ज्ञान और कौशल के माध्यम से एक नए राष्ट्र का निर्माण होगा। मीडिया शिक्षा के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए प्रो बामजेई ने कहा अब समय आ गया है कि हमें जनसंचार शिक्षा में बदलाव करना चाहिए। हमें पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रमों का निर्माण करना चाहिए, जो आज के समय के हिसाब से हों। उन्होंने कहा कि हमें अपना विजन बनाना होगा कि पत्रकारिता के शिक्षण को हम किस दिशा में लेकर जाना चाहते हैं।
मीडिया शिक्षण में चल रही है स्पर्धा
इस मौके पर नवभारत, इंदौर के पूर्व संपादक प्रो कमल दीक्षित ने कहा कि मीडिया शिक्षण में एक स्पर्धा चल रही है। अब हमें यह तय करना होगा कि हमारा लक्ष्य स्पर्धा में शामिल होने का है, या फिर बेहतर पत्रकारिता शिक्षण का माहौल बनाने का है। प्रो दीक्षित ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता बहुत बदल गई है, इसलिए पत्रकारिता शिक्षा में भी बदलाव आवश्यक है। आज लोग जैसे डॉक्टर से अपेक्षा करते हैं, वैसे पत्रकार से भी सही खबरों की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कोर्स बनाएं, जिनमें कंटेट के साथ साथ नई तकनीक का भी समावेश हो। प्रो दीक्षित ने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि पत्रकारिता का मकसद क्या है। क्या हमारी पत्रकारिता बाजार के लिए है, कॉरपोरेट के लिए है, सरकार के लिए है या फिर समाज के लिए है। अगर हमें सच्चा लोकतंत्र चाहिए, तो पत्रकारिता को अपने लक्ष्यों के बारे में बहुत गहराई से सोचना होगा।