एक व्यक्ति ने यह कहते हुए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर हाल ही में संशोधित किए गए धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन की शिकायत दर्ज नहीं की। शख्स की याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में और जानकारी मांगी है। यह कानून 15 जून से प्रभाव में आया था।
याचिकाकर्ता मोहम्मद सैयद का आरोप है कि आणंद जिले में पुलिस ने उनकी साढ़े तीन महीने पुरानी शिकायत को अब तक दर्ज नहीं किया है। उन्होंने अपनी शिकायत में अपनी बेटी का अपहरण कर लिए जाने और और विवाह के बाद उसे जबरन हिंदू धर्म कबूल करवाए जाने की बात कही थी।
न्यायाधीश इलेश जे वोरा ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए सहायक लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि 24 जून 2021 की इस शिकायत के संबंध में पुलिस से जानकारी हासिल करें। याचिकाकर्ता के अनुसार उसने यह शिकायत आणंद के पुलिस अधीक्षक से की थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 27 अक्तूबर तय की है।
याचिकाकर्ता के अनुसार उसकी बेटी 16 जून 2021 को लापता हो गई थी। बाद में उन्हें पता चला कि एक व्यक्ति ने झांसा देकर उसकी बेटी से शादी कर ली और जबरदस्ती उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया। मोहम्मद सैयद के अनुसार वह धार्मित स्वतंत्रता अधिनियम (संशोधित) के तहत एफआईआर दर्ज करवाने के लिए खंभात पुलिस स्टेशन गए थे।
सैयद का आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और शिकायत को केवल स्टेशन डायरी में दर्ज किया। याचिका में आणंद जिले के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर, दोनों को प्रतिवादी बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधित) अधिनियम के तहत विवाह करके जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन के मामले में सजा देने का प्रावधान है। यह अधिनियम राज्य की भाजपा सरकार ने इसी साल 15 जून को अधिसूचित किया था। यहां खास बात है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा रखी है।