सादिक बने पहले मुख्यमंत्री
हजरतबल की मस्जिद से जुड़ी घटना के कारण वर्ष 1963 में बख्शी को अपना पद छोड़ना पड़ा। इसका घाटी में व्यापक विरोध हुआ और अक्टूबर 1963 में ख्वाजा शम्सुदीन राज्य के प्रधानमंत्री बनाए गए। फरवरी 1964 को ख्वाजा को भी हटा दिया गया और जीएम सादिक नए प्रधानमंत्री बने। मार्च 1965 में प्रधानमंत्री का पद बदलकर इसे मुख्यमंत्री बना दिया गया और सादिक राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने।
1967 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत प्राप्त करते हुए 61 सीटें जीत ली थीं। भारतीय जनसंघ ने तीन सीटें जीती थीं और बख्शी गुलाम मोहम्मद की नेशनल कॉन्फ्रेंस को महज आठ सीटें मिली थीं। 12 दिसंबर 1971 को सादिक का निधन हो गया और उनके स्थान पर सैयद मीर कासिम राज्य के मुख्यमंत्री बने।
कासिम 25 फरवरी 1975 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे लेकिन इंदिरा-शेख समझौते के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी और शेख को मुख्यमंत्री बने। (यही शेख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला के दादा और फारूक अब्दुल्ला के पिता थे) लेकिन कांग्रेस ने शेख अब्दुल्ला को दिया समर्थन वापस ले लिया और यहां राष्ट्रपति शासन रहा। 1977 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को जोरदार सफलता मिली और शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनाए गए। 8 सितंबर 1982 को शेख अब्दुल्ला के निधन के बाद उनके बेटे डॉ. फारूक अब्दुल्ला को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया।