ईवीएम की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों को लेकर कांग्रेस पार्टी भले ही विपक्ष के साथ सुर में सुर मिलाती हुई दिखी, मगर अपने चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसे ईवीएम से गुरेज नहीं है। मंगलवार को जारी पार्टी के घोषणा पत्र में मत पत्र से वोटिंग कराने का कोई जिक्र नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने केवल इतना कहा है कि जब वह सत्ता में आएगी तो यह सुनिश्चित करेगी कि ईवीएम और वीवीपीएटी से छेड़छाड़ न हो सके। मतगणना के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत ईवीएम तथा वीवीपीएटी का मिलान भौतिक गणना के साथ किया जाएगा।
बता दें कि पिछले दो-तीन साल से विपक्षी पार्टियां ईवीएम के जरिए मतदान कराने को लेकर सवाल उठाती रही हैं। इस बाबत विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधिमंडलों ने समय-समय पर देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन भी सौंपा है। कई विपक्षी दलों ने ईवीएम का विरोध करते हुए दोबारा से मतपत्र प्रणाली से वोटिंग कराने की मांग की थी। नेताओं का कहना था कि ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है। यहां तक कि ब्रिटेन में जब ईवीएम को लेकर कथित तौर पर यह खुलासा हुआ कि इसकी मदद से वाटिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है।
कांग्रेस पार्टी के नेता कपिल सिब्बल खुद ब्रिटेन में मौजूद थे। उसके फौरन बाद चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा था कि वह व्यक्ति भारतीय चुनाव प्रणाली को जानबूझकर बदनाम करने की साजिश रच रहा है। ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है। उसके साथ कोई गड़बड़ नहीं हो सकती। यहां तक कि चुनाव आयोग ने उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत भी दी थी कि जिसने ब्रिटेन में भारतीय ईवीएम में छेड़छाड़ संभव होने का दावा किया था। उस वक्त भी कांग्रेस पार्टी ने अलग से कोई राह नहीं अपनाई, बल्कि जैसे विपक्षी दलों ने कहा, उनकी हां में हां कर दी।
पार्टी नेताओं से जब यह सवाल पूछा जाता कि क्या कांग्रेस पार्टी ईवीएम का विरोध करती है तो उनका जवाब होता, अभी इसकी जांच कर रहे हैं। चुनाव आयोग से हम मांग करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में ईवीएम और वीवीपीएटी का मिलान किया जाए। तब पार्टी का कहना था कि कम से कम 25 प्रतिशत मिलान हो। विपक्षी दलों ने जब यह कहा कि मिलान की सीमा पचास फीसदी हो तो कांग्रेस पार्टी ने भी वही कह दिया।