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खोरी गांव मामला: पुनर्वास योजना के लिए आवेदन जमा करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया, जानिए और क्या कहा

Mon, 15 Nov 2021 10:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने खोरी गांव से विस्थापित हुए लोगों द्वारा पुनर्वास योजना के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख बढाने की मांग को ठुकरा दिया।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फरीदाबाद के खोरी गांव से विस्थापित हुए लोगों के लिए लाई गई पुनर्वास योजना के लिए आवेदन जमा करने की तारीख बढाने से इनकार कर दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने फ्लैट की कीमत  377500 रुपए तय करने को भी मुनासिब करार दिया है। 15 नवंबर आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख थी।

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जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने खोरी गांव से विस्थापित हुए लोगों द्वारा पुनर्वास योजना के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख बढाने की मांग को ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि हम दो बार अंतिम तारीख बढ़ा चुके हैं, अब और नहीं बढ़ा सकते। हालांकि विस्थापितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख के बार-बार आग्रह करने के बाद पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वह आपनी मांग को लेकर आयुक्त के पास जा सकते हैं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट की कीमत  377500 रुपए तय करने को भी मुनासिब करार दिया है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फरीदाबाद नगर निगम से यह जानना चाहा था कि फ्लैट की कीमत 375500 रुपए तय करने के पीछे क्या वजह है जबकि ये फ्लैट प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए थे और उस योजना के तहत तय की गई राशि कम थी। 
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सोमवार को नगर निगम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरुण भारद्वाज ने पीठ के समक्ष फ्लैट की कीमत तय करने का विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि यह राशि बेहद कम है और यह काफी रियायती दरों पर है। उन्होंने बताया कि इस फ्लैट की कीमत 1076900 रुपए बैठती है लेकिन लोगों से महज 377500 लिए जा रहे हैं। साथ ही 20 वर्षों के किश्त पर भुगतान करने की सुविधा है और इसके लिए महज 2.5 फ़ीसदी ब्याज तय की गई है।

उन्होंने बताया कि 20 वर्षों की किश्त पर लोगों को 1572 रुपए प्रतिमाह देने होंगे। साथ ही भारद्वाज ने यह भी बताया कि फ्लैट की कीमत फरीदाबाद नगर निगम ने नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा तय की गई है। नगर निगम की दलीलों से पर संतुष्टि जताते हुए पीठ ने फ्लैट की कीमत को मुनासिब करार दिया और  इसकी कीमत कम करने की विस्थापितों की मांग को ठुकरा दिया।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहचान के लिए मांगे जाने वाले दस्तवेज़ों की सूची को खोरी पुनर्वास योजना पर भी लागू करने के लिए कहा। हालांकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ ये दस्तावेज सिर्फ पहचान के लिए होंगे। लोगों को यह साबित करने के लिए कि वे खोरी गांव में रहते थे उन्हें अन्य दस्तावेज पेश करने होंगे। अथॉरिटी द्वारा उन दस्तवेज़ों का सत्यापन किया जाएग। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि परिवार का एक ही सदस्य पुनर्वास योजना के तहत आवेदन करने का पात्र होगा।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाले फ्लैटों में व्यवसायिक गतिविधियों की इजाजत नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव में व्यवसायिक गतिविधियों चलाने वाले लोगों की उस मांग को ठुकरा दिया कि उन्हें भी पुनर्वास योजना के तहत का लाभ मिलना चाहिए।

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