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Kargil Vijay Diwas 2020: वैश्विक ताकत बनकर उभरा भारत, परमाणु परीक्षण के एक साल बाद प्रतिबंध लगाने वाले देश पड़े ढीले      

Sun, 26 Jul 2020 12:33 PM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • पाक को नेस्तनाबूद कर बढ़ाई सामरिक और खुफिया क्षमताएं      
  • कूटनीतिज्ञों के अनुसार, जीत से अमेरिका, यूरोप हमारे करीब आए, कूटनीतिक दायरा हुआ मजबूत
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कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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1998 में परमाणु परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहे भारत के लिए कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। अचानक हुई घुसपैठ पर पलटवार में भारत को समय जरूर लगा, लेकिन ऑपरेशन विजय ने दुश्मन को नेस्तनाबूद कर दुनिया के सामने उसका असल चेहरा उजागर कर दिया।

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21 साल पहले उस मुश्किल घड़ी में मिली ऐतिहासिक जीत ने देश को उसकी मजबूत सैन्य क्षमता और कूटनीतिक ताकत का अहसास कराने में बड़ी भूमिका निभाई। पाक का साथ देते रहे अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने भारत के साथ साझेदारी की राह पकड़ी। साथ ही, उसी दौरान पश्चिमी सीमा से सियाचिन तक सैन्य मोर्चे पर पता चलीं कमजोरियों पर पार पाते हुए देश ने पुख्ता रक्षा तैनाती और आधुनिक उपकरण हासिल करने की रफ्तार बढ़ाई। सामरिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, 1999 के बाद सिलसिलेवार ढंग से सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर मिली बढ़त के चलते आज हम दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत रखते हैं। यही वजह है कि अब पाकिस्तान दोबारा कारगिल जैसी हरकत करने की हिम्मत नहीं कर सकता।

पेश है 21 वर्षों में मजबूत होते भारत की कहानी, खुद विशेषज्ञों की जुबानी...

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अमर शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला

तब साजो-सामान था अधूरा  अब काफी हद तक हुआ पूरा

कारगिल संघर्ष में भारत हथियार, बारूद से लेकर रडार और सैटेलाइट तस्वीरों तक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। जवान दुश्मन को घुटने टिकाने के हौसले से लबरेज थे, पर तब उनके पास साजो-सामान का अभाव होता था। खुद तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने बताया, आलम यह था कि किसी इन्फेंट्री बटालियन के पास पर्याप्त हथियार तक नहीं होते थे। उस दौरान कई देशों ने खरीद-फरोख्त में हमारी मजबूरी का भी खूब फायदा उठाया था। लेकिन तब सरकार को इस कमी का बखूबी अहसास हुआ। उन्नत हथियार और सर्विलांस तंत्र की जरूरतें पूरी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। आज हम यूएवी, रडार, सैटेलाइट तस्वीरों समेत बारूद के लिए काफी हद तक आत्मनिर्भर हुए हैं। हालांकि आधुनिक हथियारों के लिए अब भी कई देशों पर निर्भरता कायम है, जिसे चरणबद्ध ढंग से खत्म किया जा सकता है।
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कारगिल विजय दिवस

सैन्य तैनाती में असमानताएं हुईं दूर

जनरल मलिक का कहना है कि कारगिल संघर्ष के बाद सबसे पहले सैन्य तैनाती में असमानताएं दूर की गईं। मसलन, युद्ध में जिस 8 माउंटेन डिवीजन ने हिस्सा लिया, वह अब भी उस क्षेत्र में तैनात हैं। जोहजी ला से सियाचिन तक नियंत्रण रेखा की देखभाल के लिए लेह में 14 वीं कोर की स्थापना हुई। सिचाचिन जैसे बर्फीले क्षेत्रों में सैनिकों के लिए सड़कों का जाल और आवास सुविधा बेहतर की गईं।

अब कहीं भी दुश्मनों से मुकाबला करने में भारत सक्षम

कारगिल युद्ध के बाद देश की तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण करने से ताकत में काफी इजाफा हुआ है। रडार और परिवहन तंत्र में मजूबती के साथ मिसाइलों, हेलिकॉप्टरों और टैंकों की संख्या बढ़ी है। आज हर मौसम में भारतीय जवान किसी भी इलाके में दुश्मन से मुकाबले करने में ज्यादा सक्षम हैं।

आने वाले दिनों में 136 राफेल, 12 नए सुखोई-30 के साथ ही 21 नए मिग-29 लड़ाकू विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल होने से वायु शक्ति निश्चित ही सातवें आसमान पर होगी। साथ ही मिग-21 और मिग-27 को हटाकर उनकी जगह नए विमान पर लाने की भी बात चल रही है।
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