जिन परिवारों को कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक दी जा चुकी हैं उनके घरों के बाहर 'सुरक्षा कवच धारण गृह' नाम से पर्चा चस्पा किया जा सकता है। ऐसा करने से उक्त स्थान पर परिवार या उन घरों की पहचान करने में आसानी होगी जो पहली या दूसरी खुराक लेने से अब तक दूर हैं। यह सुझाव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को एक बैठक में दिया।
देश के अधिकांश राज्यों में कोरोना की पहली खुराक शत-प्रतिशत पूरी कर ली गई है, लेकिन कुछ प्रदेश ऐसे भी हैं जिसकी रफ्तार सुस्त है। पूर्वोत्तर राज्यों में टीकाकरण बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान बताया गया कि इन इलाकों में टीकाकरण को बढ़ाना बहुत जरूरी है। मेघालय में कुल 20 में से 8 लोग अभी भी वैक्सीन से दूर हैं। जबकि 2.5 लाख को दूसरी खुराक लेने का वक्त आ चुका है। इसी तरह मणिपुर में 10 लाख लोगों को अभी तक एक भी खुराक नहीं लगी है। वहीं 3.7 लाख लोगों को दूसरी खुराक लगना बाकी है। नगालैंड में 7.5 और पुडुचेरी में 3.88 लाख लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं ली है।
इस दौरान मांडविया ने इन राज्यों से कोरोना टीकाकरण अभियान में तेजी लाने का आग्रह किया। इन राज्यों में टीकाकरण कम हुआ है, जिसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता जताई है। मांडविया ने कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में टीकाकरण सबसे शक्तिशाली हथियार है। ऐसे में राज्यों को टीकाकरण की रफ्तार को बढ़ाने की जरूरत है।
43 फीसदी लोगों को टीके की दोनों खुराक
बैठक में जानकारी दी गई कि देश में अब तक 82 फीसदी व्यस्क आबादी वैक्सीन की पहली खुराक ले चुकी है। जबकि 43 फीसदी आबादी दोनों खुराक लेकर टीकाकरण पूरा कर चुकी है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में पहली और दूसरी दोनों खुराक का टीकाकरण राष्ट्रीय स्तर से कम है। पुडुचेरी में पहली खुराक का टीकाकरण 66 फीसदी है लेकिन दूसरी खुराक का टीकाकरण यहां 39 फीसदी हुआ है। इसी तरह नगालैंड में 49 व 36, मेघालय में 57 और 38 एवं मणिपुर में 54 और 36 फीसदी टीकाकरण दर्ज किया गया है।
अब दस हजार से कम नए मरीज
538 दिन बाद देश में कोरोना संक्रमण के सबसे कम मामले सामने आए हैं। पिछले एक दिन में कोरोना वायरस के 8,488 नए मामले सामने आए हैं। वहीं एक दिन में 249 लोगों की मौत हुई। इस दौरान 12510 मरीजों को ठीक घोषित किया गया। इसी के साथ ही देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 1,18,443 रह गई है जो 534 दिन में सबसे कम है। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दिन में 7.83 लाख सैंपल की जांच की गई थी जिनमें 1.08 फीसदी सैंपल कोरोना संक्रमित मिले हैं।
'हर घर दस्तक' अभियान
सरकार ने टीकाकरण के लिए एक महीने तक चलने वाला 'हर घर दस्तक' अभियान भी चला रखा है। इस अभियान के तहत घर-घर जाकर उन लोगों को टीका लगाया जा रहा है जिन्होंने अभी तक पहली खुराक भी नहीं ली है और जिनकी दूसरी खुराक बाकी है। सरकारी आकड़ों के अनुसार, दो खुराकों के बीच के निर्धारित अंतराल खत्म होने के बाद, 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक लगना बाकी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने लिखी चिट्ठी
इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव को पत्र लिखा है। इसमें 'हर घर दस्तक' अभियान के तहत कोरोना टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है। इसमें सुझाव दिया गया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कार्यस्थल पर कोविड-19 के टीकाकरण का आयोजन कर सकते हैं, ताकि लोगों को उनकी खुराक दी जा सके। साथ ही कर्मचारियों को अपने गैर-टीकाकरण वाले सहयोगियों को टीका लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संदेश वाले बैज भी प्रदान किए जाएं।
भूषण ने कहा कि विश्वसनीय व्यक्तियों और समुदाय के नेताओं की पहचान की जा सकती है और उन्हें राजदूत के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। वे टीके की खुराक लेने और टीकाकरण कार्यक्रम को पूरा करने के महत्व पर सलाह देने के लिए 'हर घर दस्तक' के बारे में उन्मुख हो सकते हैं।
बूस्टर खुराक की जरूरत के समर्थन में वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं: आईसीएमआर प्रमुख
कोरोना टीके की बूस्टर डोज देने के लिए अभी तक कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने सोमवार को यह बात कहते हुए कहा कि अभी सरकार का पूरा ध्यान देश की वयस्क आबादी को टीके की दोनों खुराक लगाने की पहली प्राथमिकता पर है। टीकाकरण पर गठित राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) अपनी अगली बैठक में बूस्टर डोज पर बात कर सकता है। एनटीएजीआई आने वाले समय में कुछ बैठकों में इस मसले पर चर्चा कर सकता है।