दरअसल, केवल चार महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस भाजपा के वोटों में बहुत बड़ा अंतर नहीं था। लोकसभा 2024 के चुनाव परिणाम में हरियाणा में भाजपा को 46.11 प्रतिशत और कांग्रेस को 47.61 प्रतिशत वोट मिले थे। यानी दोनों दलों के वोटों में केवल 1.5 प्रतिशत का अंतर था। अरविंद केजरीवाल के चुनाव मैदान में आने से आम आदमी पार्टी को जो 1.79 प्रतिशत वोट शेयर मिला है, यदि माना जाए कि वह वोट शेयर कांग्रेस का था, तो इसी वोट शेयर ने कांग्रेस का पूरा खेल बिगाड़ दिया और दस साल बाद हरियाणा में वह सत्ता में आते-आते रह गई।
हरियाणा में विधानसभा चुनाव में जाने से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की कोशिशें हुई थीं। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा आखिरी समय तक इस गठबंधन के खिलाफ थे. उनके कारण यह गठबंधन नहीं हो पाया। आम आदमी पार्टी नेता संदीप पाठक ने दावा किया था कि जो लोग आम आदमी पार्टी को कमजोर करके आंक रहे हैं, उन्हें चुनाव के बाद पछताना पड़ेगा। आंकड़े बता रहे हैं कि पाठक सही साबित हो रहे हैं।
'कांग्रेस का खेल बिगाड़ने के लिए केजरीवाल को लाया गया'
प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने ने हाल ही में कहा था कि हरियाणा चुनाव में कांग्रेस का खेल खराब करने के लिए ही अरविंद केजरीवाल को (चुनाव में) लाया गया है। उनका कहना था कि कांग्रेस के वोट शेयरों में कटौती करने के लिए अरविंद केजरीवाल को सामने किया गया है जिससे आम आदमी पार्टी कांग्रेस का वोट काट सके और भाजपा का रास्ता साफ हो सके। चुनाव परिणाम इशारा कर रहे हैं कि कांग्रेस नेता का आकलन गलत नहीं था।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर लगभग बराबर हैं। दोनों पार्टियों के वोटों में अंतर से अधिक वोट अकेले अरविंद केजरीवाल को मिल गए हैं। इससे यह बात प्रमाणित होती है कि अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस का खेल खराब कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह बात भी ध्यान देना चाहिए कि भाजपा ने अपनी गलती से सीख लिया है। पार्टी जिस तरह लोकसभा चुनाव के पहले मुस्लिम तुष्टीकरण की राह पर चलने लगी थी, चुनाव में पिछड़ने के बाद उसने अपने कोर वोट बैंक को ही साधने पर जोर दिया है और उसे उसका परिणाम भी मिल गया।
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि इसी तरह पार्टी ने अग्निपथ योजना के अग्निवीर जवानों को पेंशन वाली नौकरी देने का वादा कर भी अपनी गलती सुधारने की कोशिश की थी जिसका उसे अच्छा परिणाम मिलता दिखाई दे रहा है। अब तक पार्टी रेवड़ी मिलने की आलोचना करती आ रही थी। लेकिन राजनीतिक मजबूरी के चलते ही सही उसने हरियाणा में भी चुनावी रेवड़ियां बांटने का काम शुरू कर दिया और इसी का परिणाम है कि कांग्रेस उसके हाथों से सत्ता नहीं छीन सकी। यदि भाजपा कांग्रेस की तरह लोक लुभावनी घोषणाएं न करती तो उसे हिमाचल प्रदेश की तरह सत्ता गंवानी पड़ सकती थी।