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जोखिम में केंद्रीय सुरक्षा बल: जम्मू-श्रीनगर रूट पर हवाई यात्रा सुविधा बंद, पुलवामा आतंकी हमले के बाद शुरू हुई थी सेवा

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 01 Sep 2021 02:22 PM IST

सार

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 31 अगस्त के बाद 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस (सस्पेंशन) रोक दी है। दो साल पहले 'पुलवामा' में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद जम्मू-कश्मीर में जवानों के सड़क मार्ग से गुजरने वाले 'काफिले' पर रोक लगा दी गई थी...
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श्रीनगर में आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान अब नए सिरे से जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने का प्रयास कर सकता है। ड्रोन से हथियार गिराने के मामले सामने आ रहे हैं। इन सबके बीच घाटी में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों, जिनमें सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे बड़े अर्धसैनिक बल शामिल हैं, उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 31 अगस्त के बाद 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस (सस्पेंशन) रोक दी है। दो साल पहले 'पुलवामा' में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद जम्मू-कश्मीर में जवानों के सड़क मार्ग से गुजरने वाले 'काफिले' पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा बलों को हवाई मार्ग से आने-जाने की सुविधा प्रदान की गई।



केंद्रीय सुरक्षा बलों के सूत्रों का कहना है, हवाई सेवा को 31 अगस्त 2021 के बाद जारी रखने की मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को पहले ही अवगत करा दिया गया था। मंत्रालय के अधिकारियों को यह सूचना दे दी गई थी कि हवाई सेवा की पांच माह की मंजूरी अवधि 01 अप्रैल 2021 से 31 अगस्त 2021 को खत्म हो रही है। 31 अगस्त के बाद एयर कूरियर सर्विस बंद हो जाएगी। आगे की अवधि की एक्सटेंशन के लिए गृह मंत्रालय को लिखा गया था। यह एक्सटेंशन सात महीने की अवधि के लिए यानी एक सितंबर से लेकर 31 मार्च 2022 तक दी जानी थी। अगर टेंडर प्रक्रिया की अवधि पहले खत्म हो जाती है तो एयर कूरियर सर्विस भी उसी समय से बंद मानी जाएगी। देश के बड़े अर्धसैनिक बल की तरफ से मंत्रालय को इस बाबत दो बार सूचित किया गया। पहली बार तीन अगस्त 2021 को मंजूरी के लिए आवेदन पत्र गृह मंत्रालय के पास भेजा गया था।

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श्रीनगर में आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान अब नए सिरे से जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने का प्रयास कर सकता है। ड्रोन से हथियार गिराने के मामले सामने आ रहे हैं। इन सबके बीच घाटी में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों, जिनमें सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे बड़े अर्धसैनिक बल शामिल हैं, उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 31 अगस्त के बाद 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस (सस्पेंशन) रोक दी है। दो साल पहले 'पुलवामा' में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद जम्मू-कश्मीर में जवानों के सड़क मार्ग से गुजरने वाले 'काफिले' पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा बलों को हवाई मार्ग से आने-जाने की सुविधा प्रदान की गई।

केंद्रीय सुरक्षा बलों के सूत्रों का कहना है, हवाई सेवा को 31 अगस्त 2021 के बाद जारी रखने की मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को पहले ही अवगत करा दिया गया था। मंत्रालय के अधिकारियों को यह सूचना दे दी गई थी कि हवाई सेवा की पांच माह की मंजूरी अवधि 01 अप्रैल 2021 से 31 अगस्त 2021 को खत्म हो रही है। 31 अगस्त के बाद एयर कूरियर सर्विस बंद हो जाएगी। आगे की अवधि की एक्सटेंशन के लिए गृह मंत्रालय को लिखा गया था। यह एक्सटेंशन सात महीने की अवधि के लिए यानी एक सितंबर से लेकर 31 मार्च 2022 तक दी जानी थी। अगर टेंडर प्रक्रिया की अवधि पहले खत्म हो जाती है तो एयर कूरियर सर्विस भी उसी समय से बंद मानी जाएगी। देश के बड़े अर्धसैनिक बल की तरफ से मंत्रालय को इस बाबत दो बार सूचित किया गया। पहली बार तीन अगस्त 2021 को मंजूरी के लिए आवेदन पत्र गृह मंत्रालय के पास भेजा गया था।

पहले पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। चूंकि मामला केंद्रीय बलों के जवानों की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए सुरक्षा बल इसे लेकर कोई लापरवाही या ढिलाई नहीं बरतना चाहते थे। 24 अगस्त को दोबारा से गृह मंत्रालय को सूचित किया गया है कि एयर कूरियर सर्विस को आगे की अवधि के लिए स्वीकृति प्रदान की जाए। इसके बाद 31 अगस्त बीत गया, लेकिन फाइल को मंजूरी नहीं मिल सकी। मजबूरन, सुरक्षा बलों को यह आदेश निकालना पड़ा कि अब 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस रोक दी गई है।

एक सितंबर 2021 से आगामी आदेशों तक यह सेवा बंद रहेगी। सुरक्षा बलों के एक अधिकारी बताते हैं कि इस मामले में गृह मंत्रालय के अधिकारी बड़ा जोखिम मोल ले रहे हैं। उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि पुलवामा हमला कैसे हुआ था। सुरक्षा बलों के 'काफिले' पर वैसे हमले न हों, इसलिए उन्हें हवाई मार्ग से आने-जाने की सुविधा प्रदान की गई थी। तभी से इस सेवा को आगे बढ़ाया जाता रहा है। बीएसएफ को इस सेवा की नोडल एजेंसी बनाया गया था।

अब घाटी में नए आतंकी संगठनों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होने के बाद पड़ोसी देश की आईएसआई और आतंकी संगठन खुश हैं। उन्हें लगता है कि अब वे लड़ाकों की मदद से जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को बड़े स्तर पर अंजाम दे सकते हैं। इन सबके बीच हवाई सेवा का बंद होना सीधे तौर पर जवानों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है, इस बाबत आला अफसरों की तरफ से ही सर्कुलर जारी करने का आदेश नहीं मिला है। वे इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते हैं। दूसरी तरफ, अब जवानों को आने जाने में सुरक्षा जोखिम के अलावा अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ट्रेन सेवाएं अभी पूरी तरह चालू नहीं हुई हैं। कश्मीर तक कोई सीधी गाड़ी नहीं है। सबसे ज्यादा खतरा भी इसी रूट पर है। यहां आईईडी, हैंड ग्रेनेड, ड्रोन और आत्मघाती हमले का अलर्ट बना रहता है।
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