भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार को लेकर आशान्वित नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देश तभी आगे बढ़ सकते हैं जब वे मुश्किल फैसले लेने का साहस कर सकें।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वह दोनों देशों के संबंधों को लेकर ज्यादा उम्मीद नहीं रखते हैं। कुछ प्रक्रिया शुरू हो सकती है लेकिन जब तक निर्णायक रूप से आगे बढ़ने की इच्छा नहीं होगी संबंधों में सुधार मुश्किल है।
थिंक टैंक ग्लोबल काउंटर टेरिज्म काउंसिल (जीसीटीसी) के ‘भारत-पाकिस्तान : क्या आगे बढ़ने का कोई रास्ता है?’ वेबिनार में उन्होंने कहा कि हमने अपनी दुश्मनी का असर अफगानिस्तान में भी देखा है। कतर के दोहा में दो अलग-अलग बैठकों की व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसमें भारत और पाकिस्तान मौजूद हों।
ऐसी स्थिति बन गई है कि हमारे दोनों देश अफगानिस्तान से संबंधित ऐसी किसी बैठक में एक साथ नहीं बैठ सकते हैं। भारत बृहस्पतिवार को दोहा में एक क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल हुआ, जिसमें अफगानिस्तान में तालिबान के लगातार हमले की पृष्ठभूमि में अफगानिस्तान में बढ़ती स्थिति को नियंत्रित करने के तरीकों पर चर्चा की गई।