मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान संगठन एमएसपी सहित अन्य मांगों को लेकर अभी भी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों ने शीतकालीन सत्र में संसद तक मार्च करने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। ये मार्च कब और कैसे निकाला जाएगा इस पर अंतिम फैसला संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लिया जाएगा। इधर, किसानों संगठन के पैदल मार्च और दिल्ली की सीमाओं को बंद रखने के फैसले ने सीबीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं के छात्रों की चिंता को बढ़ा दिया है। क्योंकि इन छात्रों की परीक्षाएं शुरु हो चुकी हैं। ऐसे में छात्रों को डर है कि संसद मार्च के चलते कहीं उनकी परीक्षाएं प्रभावित न हों।
पीएम मोदी ने शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा अभी आंदोलन को खत्म करने की जल्दबाजी में नहीं दिखाई दे रहा है। रविवार को सिंघु बॉर्डर पर हुई बैठक के बाद पीएम को एक खुला पत्र लिखा था। इसमें किसानों ने अपनी छह मांगों को उठाया है। अमर उजाला से चर्चा करते हुए किसान नेता हन्ना मौला ने कहा कि किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर एक खुला पत्र पीएम मोदी के नाम लिखा है। अब तक पीएमओ या सरकार की तरफ से कोई जवाब हमें नहीं मिला है। अगर सरकार हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं करती है या एमएसपी पर कोई कानून नहीं आता है जब तक हम आंदोलन जारी रखेंगे। जहां तक बात संसद मार्च की है, तो उसका निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में होगा।
परीक्षा देने वाले छात्रों को देंगे जगह
अमर उजाला से चर्चा करते हुए वरिष्ठ किसान नेता शिवकुमार कक्काजी ने कहा कि बुधवार को तीन कानून वापस लेने के प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट मंजूर कर सकती है। इसके बाद सभी किसान नेताओं की दिल्ली में बैठक होंगी, इसके बाद ही पैदल मार्च पर फैसला होगा। हालांकि किसान नेता राकेश टिकैत कह चुके हैं कि जब तक संसद से तीनों कृषि कानून वापस नहीं होते तब तक हम लोग आंदोलन जारी रखेंगे। अभी भी हमारी एमएसपी सहित अन्य मांगों पर सरकार ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। जहां तक सीबीएसई के बच्चों की परीक्षाओं का प्रश्न है, तो मार्च के दौरान बच्चों को कोई परेशानी न आए इसका भी पूरा ध्यान रखेंगे।