कृषि कानूनों के खिलाफ 40 किसान संगठनों के भारत बंद का देश में आंशिक असर देखने को मिला। सबसे ज्यादा प्रभावित पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी रहे, जहां सोमवार को जनजीवन बाधित रहा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न जगहों पर राजमार्गों व प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। कई स्थानों पर रेल की पटरियों पर भी बैठ गए, जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ। उत्तर रेलवे के अनुसार, बंद से 50 ट्रेनें प्रभावित हुईं।
हरियाणा के 17 जिलों में जनजीवन बाधित रहा। आंदोलनकारियों ने हरियाणा में 320 जगह जाम लगाया, तो पंजाब में 370 से ज्यादा जगह पर यातायात रोका। सोनीपत में 250 अज्ञात किसानों पर केस दर्ज हुआ। वहीं, पश्चिमी यूपी के मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में कई जगह सड़क जाम की गई। मेरठ और मंडल के अन्य जिलों में दो सौ से अधिक स्थानों पर किसानों ने चक्का जाम किया। यूपी गेट पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सभी लेन ठप कर दस घंटे धरना दिया।
वहीं, अयोध्या में जुलूस निकाल रहे 50 किसानों को हिरासत में ले लिया गया। बाराबंकी में भी प्रदर्शनकारी कई किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। केरल में बंद का असर दिखा, जहां सड़कें सुनसान रहीं, दुकानें बंद रहीं और लोग घरों में कैद रहे। बंगाल के कुछ हिस्सों में वाम दलों के कार्यकर्ता रेलवे लाइनों पर बैठ गए, बाद में उन्हें हटा दिया गया। बिहार में राजद-कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कुछ जगह रेल यातायात बाधित किया। तकरीबन सभी विपक्षी पार्टियों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया था।
दिल्ली-एनसीआर में भारी जाम
बंद का सबसे अधिक असर दिल्ली-एनसीआर के लोगों को झेलना पड़ा। दिल्ली व पड़ोसी राज्यों की तरफ से आने वाली अधिकतर सड़कें बाधित होने से लोग परेशान रहे। नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम के हजारों लोग दफ्तरों तक पहुंचने के लिए घंटों मशक्कत करते रहे। हालांकि, राजधानी दिल्ली के अंदरूनी हिस्सों में यातायात सामान्य रहा और दुकानें खुली रहीं।
आंदोलन छोड़ वार्ता को आएं किसान
किसान आंदोलन का रास्ता छोड़कर बातचीत के रास्ते पर आएं। सरकार कृषि कानूनों पर किसानों की आपत्तियों पर विचार के लिए तैयार है। पहले भी कई बार बात हुई है। यदि कुछ बच गया है तो सरकार फिर वार्ता के लिए तैयार है। किसान आंदोलन के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। किसान हम सभी के हैं।
-नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषिमंत्री
कई राज्यों में सड़कों पर उतरे किसान
बंद ऐतिहासिक था। हो सकता है, अब सरकार का अहंकार कुछ कम हुआ हो। कई राज्यों में किसान सड़कों पर उतरे। इस बंद के कारण जिन लोगों को परेशानी हुई, उनसे हम माफी मांगते हैं और हमारा समर्थन करने की अपील करते हैं।
-योगेंद्र यादव, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता
तालिबान की राह पर किसान नेता
वह (टिकैत) अपने आप को किसान नेता कहते हैं और फिर भारत बंद की घोषणा करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था और किसानों पर असर पड़ता है। इससे किसी को भी फायदा कैसे हो सकता है? इस तरह की गतिविधियां चला कर वह तालिबान के कदमों पर चलना चाहते हैं।
-भानू प्रताप, भारतीय किसान यूनियन (भानू) के प्रमुख