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किसानों का भारत बंद: 50 से ट्रेनें हुईं प्रभावित, पंजाब से लेकर ओडिशा तक ऐसा रहा असर

Tue, 28 Sep 2021 06:10 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

किसानों के भारत बंद का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखने को मिला। केरल भी बंद का आंशिक प्रभाव रहा, परंतु बाकी राज्यों में इसका खास असर नहीं दिखा। कुछ राज्यों में सार्वजनिक वाहन सेवा ठप होने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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भारत बंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृषि कानूनों के खिलाफ 40 किसान संगठनों के भारत बंद का देश में आंशिक असर देखने को मिला। सबसे ज्यादा प्रभावित पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी रहे, जहां सोमवार को जनजीवन बाधित रहा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न जगहों पर राजमार्गों व प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। कई स्थानों पर रेल की पटरियों पर भी बैठ गए, जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ। उत्तर रेलवे के अनुसार, बंद से 50 ट्रेनें प्रभावित हुईं।

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हरियाणा के 17 जिलों में जनजीवन बाधित रहा। आंदोलनकारियों ने हरियाणा में 320 जगह जाम लगाया, तो पंजाब में 370 से ज्यादा जगह पर यातायात रोका। सोनीपत में 250 अज्ञात किसानों पर केस दर्ज हुआ। वहीं, पश्चिमी यूपी के मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में कई जगह सड़क जाम की गई। मेरठ और मंडल के अन्य जिलों में दो सौ से अधिक स्थानों पर किसानों ने चक्का जाम किया। यूपी गेट पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सभी लेन ठप कर दस घंटे धरना दिया। 

वहीं, अयोध्या में जुलूस निकाल रहे 50 किसानों को हिरासत में ले लिया गया। बाराबंकी में भी प्रदर्शनकारी कई किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। केरल में बंद का असर दिखा, जहां सड़कें सुनसान रहीं, दुकानें बंद रहीं और लोग घरों में कैद रहे। बंगाल के कुछ हिस्सों में वाम दलों के कार्यकर्ता रेलवे लाइनों पर बैठ गए, बाद में उन्हें हटा दिया गया। बिहार में राजद-कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कुछ जगह रेल यातायात बाधित किया। तकरीबन सभी विपक्षी पार्टियों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया था।
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दिल्ली-एनसीआर में भारी जाम
बंद का सबसे अधिक असर दिल्ली-एनसीआर के लोगों को झेलना पड़ा। दिल्ली व पड़ोसी राज्यों की तरफ से आने वाली अधिकतर सड़कें बाधित होने से लोग परेशान रहे। नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम के हजारों लोग दफ्तरों तक पहुंचने के लिए घंटों मशक्कत करते रहे। हालांकि, राजधानी दिल्ली के अंदरूनी हिस्सों में यातायात सामान्य रहा और दुकानें खुली रहीं। 

आंदोलन छोड़ वार्ता को आएं किसान
किसान आंदोलन का रास्ता छोड़कर बातचीत के रास्ते पर आएं। सरकार कृषि कानूनों पर किसानों की आपत्तियों पर विचार के लिए तैयार है। पहले भी कई बार बात हुई है। यदि कुछ बच गया है तो सरकार फिर वार्ता के लिए तैयार है। किसान आंदोलन के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। किसान हम सभी के हैं। -नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषिमंत्री

कई राज्यों में सड़कों पर उतरे किसान

बंद ऐतिहासिक था। हो सकता है, अब सरकार का अहंकार कुछ कम हुआ हो। कई राज्यों में किसान सड़कों पर उतरे। इस बंद के कारण जिन लोगों को परेशानी हुई, उनसे हम माफी मांगते हैं और हमारा समर्थन करने की अपील करते हैं। -योगेंद्र यादव, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता

तालिबान की राह पर किसान नेता

वह (टिकैत) अपने आप को किसान नेता कहते हैं और फिर भारत बंद की घोषणा करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था और किसानों पर असर पड़ता है। इससे किसी को भी फायदा कैसे हो सकता है? इस तरह की गतिविधियां चला कर वह तालिबान के कदमों पर चलना चाहते हैं। -भानू प्रताप, भारतीय किसान यूनियन (भानू) के प्रमुख

कुछ राज्यों में सार्वजनिक वाहन सेवा ठप रही

तीन कृषि बिलों के विरोध में किसानों के भारत बंद का उत्तर भारत को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में छिटपुट असर रहा। पंजाब और हरियाणा में बंद का व्यापक असर दिखा। यहां 10 घंटे सड़कों पर आवागमन थमा रहा। वहीं कई राज्यों में बंद की शुरुआत में प्रदर्शनकारी सड़कों या रेल लाइनों पर उतरे मगर पुलिस ने उन्हें हटा दिया। हालांकि विपक्ष शासित कुछ राज्यों में बंद का असर दिखा। खासकर केरल, तमिलनाडु में सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ा।
  • केरल : इस दक्षिण भारतीय राज्य में सरकार और विपक्ष दोनों के ही बंद के समर्थन में होने और अधिकांश ट्रेड यूनियनों के बंद के समर्थन में आने के कारण राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवा पूरी तरह बाधित रही। लोगों ने भी बाहर निकलने से परहेज किया। कई शहरों में बाजार भी बंद दिखे। कोझिकोड में लोगों ने एशियानेट ब्रॉडबैंड का दफ्तर बंद न करने पर तोड़फोड़ की।
  • आंध्र प्रदेश :  राज्य में गुलाब चक्रवात के कारण हो रही भारी बारिश के चलते बंद का खास असर नहीं दिखा। लोग मूसलाधार बारिश के कारण ही परेशान दिखे।
  • ओडिशा : ओडिशा में बाजार बंद रहे। कांग्रेस ने कई जगह प्रदर्शन किया। भुवनेश्वर, बालासोर, बारगढ़, बोलांगिर समेत कई जगह पर सड़कें बंद रहीं। भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन को भी बंद रखा।
  • तमिलनाडु : राज्य के कई ट्रेड यूनियनों ने बंद का समर्थन किया था। सत्ताधारी डीएमके भी किसानों के समर्थन में थी। इससे दुकानें व बाजार बंद दिखे।
  • पंजाब और हरियाणा : भारत बंद का असर इन्हीं दोनों राज्यों में सबसे अधिक रहा। पूरे दस घंटे राष्ट्रीय राजमार्ग सहित लगभग सभी सड़कों पर आवागमन ठप रहा। फिरोजपुर मंडल की करीब 40 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित रहीं। पंजाब में किसानों ने अमृतसर, जालंधर, पठानकोट, लुधियाना समेत कई जिलों में राष्ट्रीय व राज्य मार्ग बंद रखे। हरियाणा में सिरसा, फतेहाबाद, कुरूक्षेत्र, पानीपत, हिसार, करनाल और कैथल में हाईवे बंद रहे।
  • पश्चिम बंगाल : माकपा कार्यकर्ताओं ने सड़क और रेल मार्ग बाधित किया। हालांकि सार्वजनिक यातायात सामान्य रहा। दफ्तरों में भी पूरी उपस्थिति रही। कोलकाता में माकपा ने कॉलेज स्ट्रीट, जाधवपुर आदि को बंद कराया था जिसे पुलिस ने खुलवा दिया। जलपाईगुड़ी, पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर, हुगली में सड़क जाम कर किसानों ने विरोध जताया।
  • जम्मू-कश्मीर : तीनों कृषि कानूनों के विरोध में माकपा नेता एम वाई तारिगामी के नेतृत्व में किसान जम्मू की सड़कों पर उतरे। जिससे सामान्य यातायात प्रभावित रहा। कुछ जगहों पर बाजार भी बंद रहे।
  • बिहार :  कांग्रेस और राजद) ने बिहार में कई स्थानों पर सड़क और रेल यातायात को बंद कराया। कई जिलों में यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। पटना में राजद कार्यकर्ताओं ने  सड़क को बंद कर नारेबाजी की।
  • असम : भारत बंद के दौरान असम में सब कुछ सामान्य रहा। बाजार से लेकर सड़क व रेल यातायात सामान्य रहा। राज्य कांग्रेस ने बंद का समर्थन किया लेकिन उसके कार्यकर्ता सड़कों पर नहीं उतरे।
  • महाराष्ट्र : राज्य के कई क्षेत्रों में बाइक रैली निकाली गई। पुणे का एपीएमसी केंद्र बंद रहा। नागपुर में सड़क बंद कर बैठे किसानों को पुलिस ने हटा दिया। कुछ लोगों को हिरासत में लिया जिन्हें बाद में छोड़ दिया।
शांतिपूर्ण रहा बंद
न्यायोचित मांग को लेकर पिछले 10 महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे अन्नदाताओं के भारत बंद को पूरे देश से सकारात्मक और मजबूत समर्थन मिलने की खबरें आ रही हैं। अधिकांश जगहों पर समाज के विभिन्न तबकों ने बंद को स्वत: समर्थन दिया है। देश के 23 से अधिक राज्यों में बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। -संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

देश किसानों के साथ, काले कानून वापस लें : प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, किसानों के खेत, किसानों की मेहनत, किसानों की फसल लेकिन भाजपा सरकार अपने खरबपति दोस्तों का नियंत्रण स्थापित करने के लिए उत्सुक है। पूरा देश किसानों के साथ है। काले कानूनों को वापस लें।

राहुल का किसानों को समर्थन सरकार को बताया शोषक
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों के ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए कहा कि देश के किसानों का अहिंसक ‘सत्याग्रह’ अभी भी दृढ़ है, लेकिन ‘शोषक’ सरकार को यह पसंद नहीं है। राहुल ने सोमवार को ट्वीट किया, किसानों का अहिंसक सत्याग्रह आज भी दृढ़ है, लेकिन शोषक सरकार को यह पसंद नहीं है और इसलिए आज भारत बंद है।

कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं और राज्य इकाई प्रमुखों को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संघों की ओर से किए गए भारत बंद में भाग लेने के लिए कहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की 10 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को कई गैर-एनडीए दलों ने समर्थन दिया है।
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थमी 50 ट्रेनों की रफ्तार, यात्री बेहाल

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद से सोमवार को करीब 50 ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया। इससे यात्री बेहाल रहे। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि दिल्ली, अंबाला और फिरोजपुर संभागों में 20 से अधिक स्थानों पर जाम लगा रहा। इसमें करीब 40 किसान संघों ने कई इलाकों में पटरियों पर बैठकर प्रदर्शन किया, जो शाम चार बजे तक चलता रहा।

10 घंटे के बाद बंद की समाप्ति और लोगों के रेल पटरियों से हटने के बाद ही प्रभावित ट्रेन सेवाएं सामान्य हो सकी। उन्होंने बताया कि बंद के चलते दिल्ली-अमृतसर शान-ए-पंजाब, नई दिल्ली-मोगा एक्सप्रेस, नई दिल्ली से कटरा जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का संचालन बाधित रहा। वहीं उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन में भी बंद के कारण रेवाड़ी-भिवानी, भिवानी-रोहतक, भिवानी-हिसार और हनुमानगढ़-सादुलपुर-श्रीगंगानगर-फतुही खंड में रेल यातायात प्रभावित रहा।

रद्द की गईं ट्रेनें
दिल्ली सराय रोहिल्ला-बीकानेर स्पेशल,जयपुर-दौलतपुर चौक स्पेशल ट्रेन सेवा, तिलकब्रिज-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन सेवा और रेवाड़ी-जोधपुर स्पेशल ट्रेन सेवा शामिल हैं।
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