एल्गार परिषद-माओवादी रिश्ते मामले में गिरफ्तार आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की हालत नाजुक बनी हुई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती रखे जाने की अवधि पांच जुलाई तक बढ़ा दी। उधर, इसी मामले में नागपुर की प्रो. शोमा सेन द्वारा पेश अमेरिकी फोरेंसिक कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग की रिपोर्ट को एनआईए ने ठुकरा दिया है। यह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ को लेकर है।
स्टेन स्वामी मामले में अस्पताल ने हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट सौंप कर कहा था कि उनका स्वास्थ्य नाजुक बना हुआ है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की मियाद बढ़ाने का आदेश जारी किया गया। हाईकोर्ट के 28 मई के आदेश के बाद 84 वर्षीय स्वामी को विचाराधीन कैदी के रूप में नवी मुंबई की तलोजा जेल से इलाज के लिए उपनगरीय बांद्रा स्थित होली फेमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। स्वामी पार्किंसंस (मस्तिष्क संबंधी बीमारी) सहित कई बीमारियों से ग्रसित हैं।
अदालत ने मामले की अभियोजन एजेंसी एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) को मेडिकल रिपोर्ट की प्रति देने का भी निर्देश दिया। पीठ ने एनआए को रिपोर्ट का अध्ययन करने और तीन जुलाई को स्वामी की याचिका पर अपनी दलील पेश करने का निर्देश दिया। बता दें, स्वामी को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं।
एनआईए को अमेरिकी फोरेंसिक कंपनी की रिपोर्ट नामंजूर
उधर, एल्गार परिषद केस की आरोपी नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन द्वारा पेश एक अमेरिकी कंपनी की फोरेंसिक रिपोर्ट को एनआईए ने खारिज कर दिया। एनआईए ने बृहस्पतिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा कि उसने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से छेड़छाड़ के अमेरिकी फोरेंसिक कंपनी के दावों को स्वीकार नहीं किया है।
जांच एजेंसी ने शोमा सेन की याचिका का विरोध करते हुए यह दलील दी। सेन ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को रद्द करने का अदालत से अनुरोध किया है। एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अनिल सिंह ने हाईकोर्ट से कहा कि एनआईए सेन द्वारा मांगी गई राहत का विरोध करती है। एनआईए ने याचिका का विरोध करते हुए एक हलफनामा भी दाखिल किया।
सुनवाई में देरी का हथकंडा
बुधवार को दाखिल किए गए हलफनामे में एनआईए ने कहा है कि सेन की याचिका स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। यह मामले में सुनवाई में देरी का हथकंडा है। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि सेन एक अलग रिट याचिका दायर कर आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता के नियमों के अनुरूप मामले से मुक्त किए जाने का अनुरोध कर सकती हैं। कंपनी ने इस साल की शुरूआत में कहा था कि एल्गार मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से छेड़छाड़ की गई थी।
अमेरिकी कंपनी को दखल का अधिकार नहीं
जांच एजेंसी ने हलफनामे में कहा कि कंपनी का इस मामले में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं बनता है। इसने कहा कि एनआईए उक्त रिपोर्ट को अस्वीकार कर चुकी है और इसे साक्ष्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की पीठ सेन और सह आरोपी रोना विल्सन की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने अंतरिम जमानत के अलावा अपने खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया है।
स्वतंत्रता से जुड़ा है मामला : इंदिरा जयसिंह
सुनवाई के दौरान सेन की ओर से पेश हुई वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह स्वतंत्रता का मुद्दा है...याचिका तीन महीने से अधिक समय से लंबित है। इस पर, अदालत ने कहा कि वह सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दे रही है। अदालत ने सभी जवाब नौ जुलाई तक दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।
क्या है एल्गार परिषद मामला
एल्गार परिषद मामला पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एक सभा में कथित भड़काउ भाषण देने से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि उक्त भाषण के बाद पश्चिमी महाराष्ट्र के बाहरी इलाकों में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सभा को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। मामले की जांच अब एनआईए कर रही है। इसमें कई कार्यकर्ताओं और अकादमिक जगत के लोगों को आरोपी बनाया गया है।