एसोसिएशन के सर्वे के मुताबिक, जवानों के तनावग्रस्त होने के दस कारण हैं...
- केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में ड्यूटी के अनुरुप वेतन नहीं मिल पा रहा है। यह पूर्ण रूप से मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।
- पदोन्नति के चांस कम होते जा रहे हैं।
- नियुक्तियों की गलत नीति है।
- समय पर छुट्टी न मिलना।
- अपने उच्च अधिकारियों का अमानवीय व्यवहार।
- परिवार से लम्बे समय तक न मिल पाना।
- दबाव में जिन्दगी जीना।
- संवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन होना।
- कैम्पस के अन्दर बंधुआ मजदूर की तरह काम कराना।
- अंग्रेजों के जमाने के बने नियमों का हवाला देकर उच्च अधिकारियों द्वारा जवानों का अनुशासन के नाम पर भावनात्मक शोषण करना
रणबीर सिंह के अनुसार, पद के नाम पर फैला व्यापक भेदभाव जवानों में हीन भावना पैदा करता है। इसके चलते जवानों का मनोबल निचले स्तर पर है। एक रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि पिछले दिनों सीआरपीएफ के तीन-चार हजार अफसरों को 1998 से लेकर अब तक के राशन मनी भत्ते का एरियर मिला था। यह भी करीब चार से पांच लाख रुपये रहा है। आरोप है कि सिपाही से इंस्पेक्टर तक को यह एरियर नहीं दिया जा रहा।
सैनिक सभा, जिसमें कोई भी कर्मी अपनी बात रख सकता है, ये भी नाम के लिए है। एक सिपाही क्या बोलेगा। वह जानता है कि उसने कुछ ऐसा बोल दिया जो बड़े साहब को ठीक नहीं लगा तो बाद में वह मुश्किल में आ जाएगा। यही वो स्थिति है कि जवान सब कुछ जानते हुए भी अपनी बात खुलकर नहीं कह सकता। कई बार ऐसी स्थिति होती है कि जवान विभागीय दबाव के चलते टूट जाता है और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है।
सरकार को चाहिए कि वह अर्धसैनिक बल सुधार के लिए रिटायर्ड जज व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की एक कमेटी गठित करे, जो जवानों से बातचीत करने के बाद सरकार को सुझाव दे। सरकार उन्हें जल्द से जल्द लागू करे। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न नहीं होगा व जवानों में असंतोष की भावना भी नहीं पनपेगी। साल 2018 में 96, 2019 में 130 और 2020 में 134 कर्मी आत्महत्या कर चुके हैं। यानी तीन साल में 360 कर्मियों ने अपना जीवन खत्म कर लिया।
ये है केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आवास की मौजूदा स्थिति ...
- असम राइफल में 25480 आवास स्वीकृत हैं, लेकिन एक जनवरी 2021 की स्थिति के अनुसार अभी 13130 आवास ही मिल सके हैं। आवास की संतुष्टि का स्तर 51 फीसदी है।
- बीएसएफ के लिए 78164 आवास स्वीकृत हैं, जबकि उपलब्ध आवास की संख्या 35004 है। संतुष्टि का स्तर 44.78 फीसदी है।
- सीआईएसएफ के लिए स्वीकृत आवासों का आंकड़ा 14661 है। अभी तक जवानों को 6422 आवास मिले हैं।
- सीआरपीएफ में आवास की स्वीकृत संख्या 88523 है, मगर उपलब्ध आवास 46175 हैं। संतुष्टि का स्तर 52.16 फीसदी हो गया है।
- आईटीबीपी में 28568 आवास मंजूर हुए हैं। अभी तक 11408 मकान तैयार हो सके हैं। संतुष्टि देखेंगे तो उसका प्रतिशत 39.93 है।
- एसएसबी के लिए 29331 आवास मंजूर हुए हैं, लेकिन मौजूदा समय में जवानों को 7677 आवास मिल सके हैं। इनकी संतुष्टि केवल 26.17 फीसदी है।
- अगर सभी बलों को मिलाकर देखें तो उनके लिए 268341 आवास स्वीकृत हैं, लेकिन उन्हें 122739 आवास ही उपलब्ध हो सके हैं। इन आवासों का संतुष्टि स्तर 45 फीसदी है।
इन बलों को लेकर सरकार क्या कहती है...
केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार, बलों में जवानों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए नियमित सैनिक सम्मेलन किए जा रहे हैं। सेमिनार और परामर्श सत्र भी आयोजित होते हैं। कार्मिकों के संतुष्टि स्तर में वृद्धि करने के लिए उन्हें छुट्टी दी जाती है। अपनी पसंद की तैनाती का विकल्प देने और पति-पत्नी को एक ही स्थान पर तैनात करने का प्रावधान किया गया है।
इसके आवास, चिकित्सा और शिक्षा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। जो कार्मिक स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेते हैं, उन्हें संभावित वित्तीय कठिनाई के संबंध में परामर्श देते हैं। स्वैच्छिक रिटायरमेंट के मामलों पर कार्रवाई तभी की जाती है, जब कोई व्यक्ति वरिष्ठ अधिकारी द्वारा परामर्श देने के बाद भी सेवा में रहने का इच्छुक न हो। सीएपीएफ में 23973 आवास निर्माणाधीन हैं। ये 2022 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इसके बाद आवास की संतुष्टि का स्तर 45.74 फीसदी से बढ़कर 54.67 फीसदी हो जाएगा।