सरकार अगले आम चुनाव से पहले डिजिटल इंडिया कानून लागू नहीं कर पाएगी। इस उद्देश्य 23 साल पुराने आईटी कानून 2000 को बदलना है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को यह बात कही।
वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2023 को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम के नियम परामर्श के लिए इस महीने के अंत में जारी किए जाएंगे। यह दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में अधिसूचित होने की उम्मीद है।
चंद्रशेखर ने कहा कि मौजूदा आईटी अधिनियम में इंटरनेट शब्द भी नहीं है। इस बात पर आम सहमति है कि इसे हटाया या बदला जा सकता है। उसके उत्तराधिकारी अधिनियम को डिजिटल इंडिया अधिनियम कहा जाता है, जिस पर कार्य प्रगति है। हमारे पास मसौदा तैयार है और इस पर काफी काम हो चुका है।
उन्होंने कहा, 'मुझे संदेह है कि अगले चुनाव से पहले हम इसे कानून नहीं बना पाएंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री जिन चीजों पर जोर देते हैं उनमें से एक यह है कि हमें हर डिजिटल कानून से व्यापक रूप से परामर्श करने की आवश्यकता है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि हमारे पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त समय है।' प्रस्तावित डिजिटल इंडिया अधिनियम (डीआईए) में ऑनलाइन खंड पर बहुत फोकस किया गया है।
उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में बात करते हुए, चंद्रशेखर ने कहा कि एआई के प्रति भारत का दृष्टिकोण जीवन को बदलने और सुशासन को बढ़ाने में अपनी भूमिका पर जोर देने के आसपास है। उन्होंने कहा,'मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत का रुख एआई को केवल सुरक्षा और विश्वास के चश्मे से देखकर उसे खलनायक की तरह पेश करने का नहीं है। हम एआई को अपने समय का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार मानते हैं।'
उन्होंने कहा कि एआई अगले दशक में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, कौशल, सुरक्षा को आकार देने और भाषा अनुवाद के माध्यम से समावेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।