केंद्र ने एक जनवरी 2004 से नई अंशदायी पेंशन योजना की शुरुआत की थी। इस बाबत 22 दिसंबर, 2003 को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से पेंशन योजना को भागीदारी वाला बना दिया गया। इसमें कर्मचारी के वेतन से ही एक हिस्सा कटता है। सरकार ने कहा कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाले और एक जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए हाइब्रिड पेंशन योजना लागू की जा रही है, जो पुरानी और नई पेंशन योजना का मिश्रण है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कहा गया कि यह नई अंशदायी पेंशन योजना भारत सरकार के सशस्त्र बलों पर लागू नहीं होती है। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले सशस्त्र बलों के लिए 6 अगस्त, 2004 को एक स्पष्टीकरण जारी किया गया था कि ये सभी बल गृह मंत्रालय के तहत केंद्र के सशस्त्र बल हैं। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले सशस्त्र बलों में बीएसएफ, आईटीबीपी, सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ तथा एनएसजी शामिल हैं। रणबीर सिंह के मुताबिक, गृह मंत्रालय के तहत आने वाले सशस्त्र बलों के सभी कर्मी पुरानी योजना के तहत पेंशन पाना चाहते हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस दिशा में कोई भी सार्थक कदम आगे नहीं बढ़ा रही है।
गरिमापूर्ण जीवन के लिए पेंशन जरूरी
रणबीर सिंह के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद एक सम्मानित एवं गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए जवानों को पेंशन मिलना आवश्यक है। गृह मंत्रालय के नियंत्रण वाले सशस्त्र बलों के प्रति विसंगति व भेदभाव केंद्र सरकार की स्वयं की नीति के विरुद्ध है। केंद्र सरकार द्वारा 22 दिसंबर, 2003 व 6 अगस्त, 2004 को जारी आदेशों में यह बात परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र बलों में जारी वेतन विसंगतियां व भेदभाव को समाप्त किया जाए। इन बलों के जवानों की मांग है कि उन्हें पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाया जाए। ये वही योजना है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन सशस्त्र बलों के लिए मान्य की गई है।
रणबीर सिंह ने कहा कि देश सेवा के लिए हर वक्त तत्पर रहने वाले केंद्रीय बलों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जाता है। सैन्य बलों के लिए सौ नए सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा कर दी जाती है, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए कोई नया स्कूल शुरू करने की बात नहीं की गई। केंद्रीय सुरक्षा बलों की सीपीसी कैंटीन, जीएसटी के चलते बाजार भाव पर आ गई है। सीएसडी कैंटीन की तर्ज पर सीपीसी कैंटीन को जीएसटी से छूट नहीं जा रही।
केंद्रीय बलों की ये मांगें भी ठंडे बस्ते में गईं
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि इन बलों की कैंटीन को जीएसटी के दायरे से बाहर रखना संभव नहीं है, तो सीएसडी कैंटीन को केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए भी अधिकृत किया जाए। सशस्त्र झंडा दिवस की तर्ज पर अर्धसेना झंडा दिवस कोष की स्थापित करना, सरदार पटेल के नाम पर अर्धसैनिक स्कूल खोलना और जवानों एवं उनके परिवारों के लिए सीजीएचएस डिस्पेंसरियों का विस्तार करना आदि शामिल है।
परेशान होकर नौकरी छोड़ रहे जवान
एसोसिएशन के मुताबिक, जोखिम भत्ता और राशन मनी को लेकर भी शिकायत रहती है। छुट्टी की समस्या खत्म नहीं हो सकी है। आवासीय सुविधा का मौजूदा स्तर संतोषजनक नहीं है। कई बलों के अधिकारियों को अपना कैडर रिव्यू, पदोन्नति और वेतन विसंगतियां दूर कराने के लिए अदालती लड़ाई लड़नी पड़ रही है। इससे परेशान होकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्त लेने और इस्तीफा देने वाले जवानों की संख्या बढ़ती जा रही है।
बल स्वैच्छिक सेवानिवृत्त इस्तीफा
- सीआरपीएफ 26,164 3396
- बीएसएफ 36768 3837
- आईटीबीपी 3837 1648
- एसएसबी 3230 1031
- सीआईएसएफ 6705 5848
(यह आंकड़ा वर्ष 2011 से लेकर 1 मार्च, 2021 तक का है।)