कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से कथित मौतों की जांच कराने की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, आपके लिए सरकार की आलोचना करना आसान है। हम पुरानी घटनाओं का पोस्टमार्टम नहीं कर सकते। ऐसा करना अथॉरिटी का मनोबल गिराना है और हम ऐसा नहीं करेंगे।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ ने जोर देकर कहा, शीर्ष न्यायालय की भूमिका भविष्य में आकस्मिक घटनाओं से निपटने के लिए सकारात्मक बदलावों पर जोर देना है न कि अथॉरिटी को दोष देने में दिलचस्पी रखना है। ‘हॉट सीट’ पर होने के कारण अथॉरिटी को कई संकटों से निपटना होता है और कई परेशानी वाले काम होते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता नरेश कुमार के वकील मेधांसु त्रिपाठी से कहा, सरकार ‘हॉट सीट’ पर है आप नहीं। यहां तक कि अदालत की भी आलोचना की जाती है। ऐसे मौके पर क्या हमें किसी विशेष योजना या पिछली घटनाओं का कानूनी पोस्टमार्टम करना चाहिए या हमें कुछ सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। जैसे हमने राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया।
पूर्व जज की अध्यक्षता में जांच कराने की थी मांग
दिल्ली निवासी इस याचिकाकर्ता ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान चिकित्सा सुविधाओं की कमी के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग की मांग की थी। साथ ही सीबीआई या एसआईटी से ऑक्सीजन की कमी की जांच कराने की मांग की गई।
कोर्ट का इस्तेमाल किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए
पीठ ने कहा, हम नहीं चाहते कि इस अदालत का इस्तेमाल किसी को निशाना बनाने के लिए किया जाए। हम जनहित याचिका की आड़ में दाखिल होने वाली इस तरह की याचिकाओं पर विचार करने को लेकर संशय में होते हैं। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को पिछले 100 वर्षों में सरकारों को विरासत में मिला है। आज जो सत्ता में हैं उन्हें दोष देना बहुत आसान है लेकिन हम ऐसी धारणाओं पर काम नहीं कर सकते हैं।
मजबूत देशों की हालत पतली हो गई
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, कोविड-19 ने उन देशों की हालत खराब कर दी थी, जिनके पास मजबूत स्वास्थ्य ढांचा है। पीठ ने याचिकाकर्ता को कुछ सकारात्मक सोचने के लिए कहा। पीठ ने देश के विभिन्न हिस्सों में आए दिनों डॉक्टरों के साथ होने वाली मारपीट पर खेद व्यक्त किया। यह गलत धारणा बनी हुई है कि अगर किसी मरीज की मौत हुई है तो यह डॉक्टर की गलती है।