संविधान दिवस कार्यक्रम के बहिष्कार से आहत लोकसभा स्पीकर ने कहा, ऐसे तो सभी मूल्य व परंपराएं खत्म हो जाएंगे। बहिष्कार से पहले विपक्ष को सोचना चाहिए था कि यह सरकार का नहीं बल्कि संसद का कार्यक्रम था। उन्होंने विपक्ष के नेता के लिए मंच पर जगह की व्यवस्था नहीं होने संबंधी आरोपों का भी खंडन किया।
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में स्पीकर ने कहा, विपक्ष को न सिर्फ आमंत्रित किया गया था बल्कि मंच पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे व लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के बैठने की व्यवस्था थी। इस आशय की जानकारी संसदीय कार्यमंत्री के अलावा उनके कार्यालय ने भी दोनों नेताओं को दी थी। बहिष्कार की जानकारी मिलने के बाद इनकी कुर्सियां मंच से हटाई गई।
अच्छी परंपराओं को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी सबकी
स्पीकर ने कहा, लोकतंत्र की अच्छी परंपराओं और मूल्यों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी सबकी है। ऐसे कार्यक्रमों के लिए हमें कुछ मर्यादाएं रखनी होंगी। विपक्ष को अगर किसी पहलु से शिकायत थी तो इसकी सूचना मुझे दी जानी चाहिए थी। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो लोकतांत्रिक परंपरा और मूल्य खत्म हो जाएंगे।
नियम-प्रक्रिया का मान जरूरी
बिरला ने कहा, लोकतंत्र में नियम-प्रक्रिया, परंपरा और मूल्य का मान-सम्मान रखना जरूरी है। सदन की कार्यवाही भी बाधित नहीं होनी चाहिए। जैसे प्रश्नकाल में बाधा का नुकसान विपक्ष को है। प्रश्नकाल में विपक्ष के पास सरकार को घेरने के पर्याप्त अवसर होते हैं। विपक्ष जो मुद्दे उठाना चाहता है, उस पर स्पीकर के निर्णय के बाद ही अपना पक्ष रख सकता है।
नायडू बोले- सरकार को दिये गए जनादेश का सम्मान हो
वहीं, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि संविधान में देश के एक लोकतांत्रित गणतंत्र होने की जरूरत को रेखांकित किया गया है, ऐसे में विधान मंडलों में चर्चा और संवाद होना चाहिए और व्यवधान डालकर इसे निष्क्रिय नहीं बनाया जाना चाहिए। नायडू ने संसद की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा किये जाने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार को दिये गए जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।
राज्य के तीनों अंग मिलकर काम करें: रिजिजू
इस बीच कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह आवश्यक है कि राज्य के तीनों अंग कार्यपालिका, विधायिक और न्यायपालिका मिलकर काम करें ताकि नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि हालांकि संविधान शक्तियों के अलगाव के सिद्धांत के आधार पर बना है, लेकिन इसमें यह भी वर्णित है कि सरकार के तीनों अंगों के सुचारू तरीके से कामकाज के लिए सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए।