फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Congress crisis: पंजाब की भयंकर भूलें सुधारने में गई थी 'इंदिरा' की जान, फिर दोराहे पर कांग्रेस  

Sat, 18 Sep 2021 10:27 PM IST
Amit Mandal जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 

सार

कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। उन्होंने सीएम बनने के बाद कई वादे किए थे। ड्रग्स रैकेट पर कठोर कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन व्यवहार में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला।
विज्ञापन
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजनीति में उलटफेर तो चलता ही रहता है। बड़ी बात ये है कि उससे पार्टी की साख नहीं गिरनी चाहिए। किसी के आत्मसम्मान को भी ठेस न लगे। वैसे दिल्ली और पंजाब के बीच लंबे समय तक तनाव रहा है। अतीत में पंजाब को लेकर भयंकर भूलें हुईं जिसकी कीमत इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। 

विज्ञापन


उसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री और कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस पार्टी ने सिखों का दिल जीता था। राजनीतिक विश्लेषक एवं जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार बताते हैं, अमरिंदर सिंह का सामंती तरीका बहुत से लोगों को अखरता रहा है। राजा, महाराजा या नवाबों वाले शौक अभी छूटे नहीं थे। विधायकों के लिए कैप्टन साहब सुगमता से उपलब्ध नहीं होते थे। अगर कांग्रेस पार्टी उनका बेहतर विकल्प तलाशने में कामयाब रहती है तो पंजाब में 2022 के चुनावी दंगल में पांव उखड़ने की नौबत से बचा जा सकता है। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। उन्होंने सीएम बनने के बाद कई वादे किए थे। ड्रग्स रैकेट पर कठोर कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन व्यवहार में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। कैप्टन पर पंजाब में अकालियों से साठगांठ रखने का बड़ा आरोप लगता रहा है। चूंकि वे हर समय बतौर सीएम उपलब्ध नहीं होते थे तो ऐसे में ब्यूरोक्रेसी उन पर हावी हो चली थी। 
विज्ञापन


जनप्रतिनिधियों की सुनवाई न तो सीएम कार्यालय में और न ही नौकरशाह उनकी बात गंभीरता से सुन रहे थे। डॉ. आनंद कुमार कहते हैं कि वादे पूरे नहीं हुए। आम लोगों से दूरी बढ़ती जा रही थी। हां, कैप्टन ने किसान आंदोलन में किसानों को हद से ज्यादा छूट दी। धरना-प्रदर्शन, बंद, सड़क रोकना या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, कैप्टन को इन सबसे कोई मतलब नहीं था। 

उन्होंने बयान भी किसानों के समर्थन में दिए। पंजाब में जब किसान आंदोलन शुरू हुआ तो अमरिंदर सिंह के बारे में लोगों ने कहा कि 2022 में कांग्रेस की दोबारा सत्ता वापसी हो रही है। डॉ. आनंद कुमार के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी अमरिंदर सिंह के मामले में ज्यादा गुण दोष नहीं देख सकी। बैठे बिठाए पंगा मोल ले लिया। अभी कुछ दिन पहले मैंने कहा था कि इंदिरा गांधी की आत्मा भाजपा में चली गई है। वह बात मुख्यमंत्री बदलने के संदर्भ में कही थी। आज पंजाब का राजनीतिक घटनाक्रम देखकर कह सकता हूं कि पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मा वापस कांग्रेस में लौट आई है। 

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत पर संकट आया तो पार्टी ने आत्मसंयम बरता। नतीजा, गहलोत की कुर्सी बच गई। वैसे कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्रियों को सम्मान देने की परंपरा नेहरू के जमाने से रही है। अब कांग्रेस 'हाईकमान' का अनिश्चितता से भरा एक कदम पार्टी की साख को बट्टा लगा सकता है। यहां तक कि कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली को लेकर पीएम मोदी और एनसीपी नेता शरद पवार भी टिप्पणी कर चुके हैं। कांग्रेस हाईकमान की शैली को अजीब बताया गया है। 

मुख्यमंत्री हटते ही पंजाब का राजनीतिक सीन बदलने लगता है। अभी तक वहां कांग्रेस, अकाली और आप, ये तीन पार्टियां ही सक्रिय रहती हैं। कहा जाता है कि एक पार्टी सत्ता में आई तो माफिया राज आ जाएगा। दूसरी पार्टी को लेकर ऐसी चर्चा होती है कि वह सरकार में आ गई तो खालिस्तान आंदोलन दोबारा से खड़ा होने में देर नहीं लगाएगा। 

कैप्टन अमरिंदर पर 'राजा की तरह' शासन करने के आरोप भले ही लगते रहें, लेकिन उन्हें माफिया का करीबी तो कोई नहीं कह सकता। अब कांग्रेस पार्टी खुद को जब नए दौर में एडजस्ट करने के लिए राह तलाश रही है तो उसके लिए कैप्टन अरमेंद्र सिंह की विदाई घाटे का सौदा नहीं बनेगी। बशर्ते वे ऐसा विकल्प तलाशें, जो उन कमियों के पार जाने में सक्षम हो, जिनके भंवर में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह फंस कर रह गए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें