मुंबई के घाटकोपर इलाके में हुए होर्डिंग हादसे को दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है। इस बीच, मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शनिवार को अदालत में 3,299 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट में दावा किया गया है कि होर्डिंग लगाने के पहले की प्रक्रिया में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। चार्जशीट में कहा गया है कि पूरे मामले में रेलवे पुलिस और नागरिक कर्मियों, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और होर्डिंग लगाने वाली फर्म ने सब इसमें शामिल हैं। अधिकारियों ने सोमवार को चार्जशीट के बारे में बताते हुए कहा कि मामले में और गहराई से जांच की जा रही है।
मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट में वीजेटीआई के साथ ही भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञों की रिपोर्ट शामिल है। उन्होंने साफ तौर पर बताया है कि होर्डिंग का निर्माण घटिया तौर पर हुआ था और तेज हवाओं को झेलने की उसकी क्षमता नहीं थी।
इस चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि ढांचा खड़ा करने से पहले किए वहां की मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट से भी खुलासा हुआ है कि पाइलिंग पांच बार की जानी थी, लेकिन विज्ञापन फर्म ने यह जांचने की जहमत नहीं उठाई कि नींव के निर्माण के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। होर्डिंग कंपनी ने होर्डिंग का ऐसा डिजाइन तैयार नहीं किया था, जिससे मानव जीवन की रक्षा होती। इसी के चलते तेज हवाओं के कारण 15 सेकंड के भीतर होर्डिंग ढह गई।
अधिकारी ने यह भी बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि होर्डिंग लगाने वाले एगो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक भावेश भिंडे ने घटना के दिन स्ट्रक्चरल इंजीनियर को फोन किया था और खुद को बचाने के लिए उनसे संरचना के स्थिरता प्रमाणपत्र की प्रतियां मांगी थीं।
आरोपपत्र में तत्कालीन मुंबई रेलवे पुलिस आयुक्त कैसर खालिद का बयान शामिल है, जिन्हें राज्य सरकार ने प्रशासनिक चूक और डीजीपी कार्यालय की मंजूरी के बिना अपने दम पर होर्डिंग को मंजूरी देने में अनियमितता के लिए निलंबित कर दिया था।
खालिद के बयान के अनुसार, चूंकि डीजीपी कार्यालय ने बीपीसीएल को रेलवे पुलिस की जमीन पर ईंधन पंप स्थापित करने की अनुमति दी थी, इसलिए उसने मान लिया कि होर्डिंग पेट्रोल पंप का हिस्सा था। अधिकारी ने निलंबित आईपीएस अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बीपीसीएल ने अपने सभी ईंधन पंपों पर होर्डिंग्स लगाए हैं, जिसके कारण खालिद ने यह धारणा बनाई। इतना ही नहीं, खालिद ने दावा किया था कि होर्डिंग को दी गई अनुमति के परिणामस्वरूप पुलिस कल्याण कोष में पर्याप्त राशि आई।
आरोपपत्र के मुताबिक, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173 (8) के तहत जांच जारी रहेगी। आरोपपत्र में बीएमसी के दो अधिकारियों और छह अधिकारियों के भी बयान शामिल हैं।