लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) की तरफ से बनाए गए आतंकी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने पिछले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में धर्म के आधार पर चुन-चुनकर गैर-मुस्लिमों की हत्याओं को अंजाम देकर सनसनी फैला रखी है। टीआरएफ की बढ़ती गतिविधयों के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
कार्रवाई से बचने के लिए लश्कर ने पहना टीआरएफ का नकाब
बैठक में एनआईए ने बताया कि एलईटी ने टीआएएफ को इस तरह से तैयार किया है कि इस समूह की गतिविधयों स्थानीय तौर पर नजर आएं। हालांकि, समूह के आतंकियों को पाक से सहयोग व समर्थन मिल रहा है।
एनआईए के मुताबिक एलईटी और उसके पाकिस्तान स्थित आईएसआई हैंडलर जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए टीआरएफ छद्म नाम का प्रयोग इसलिए कर रहे हैं, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बच सकें। असल में एनआईए को बठिंडा में मिले आईईडी की जांच के टीआरएफ के बारे में जानकारी मिली थी।
पुलिस को मिले अहम सुराग
कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने बताया कि पुलिस को इस बात के अहम सुराग मिले हैं कि हाल ही में हुई लक्षित हत्याओं की घटनाओं के पीछे एलईटी-टीआरएफ का हाथ है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिंदू-सिख व गैर-मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। वहीं, खुफिया एजेंसियों ने बताया कि अगस्त में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में टीआरएफ के दो आतंकियों में एलईटी का शीर्ष कमांडर अब्बास शेख और टीआरएफ का स्वघोषित प्रमुख साकिब मंजूर मारे गए थे।
टारगेट किलिंग के खिलाफ पीओके से भी उठी आवाज
जम्मू-कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग के खिलाफ अब खुद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से भी आवाज उठने लगी है। क्षेत्र के राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ अमजद अयूब मिर्जा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ती आतंकी घटनाओं पर चिंता जताई है। परिषद की अध्यक्ष नजहत शमीम को भेजी चिट्ठी में उन्होंने लिखा है, इस बात पर गौर करना महत्वपूर्ण है कि इन टारगेट किलिंग के अधिकांश पीड़ित हिंदू और सिख समुदाय के लोग है।