भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा की रक्षा के लिए तैनात 'बीएसएफ' के कई जवान कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इन जवानों ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से न केवल इस महामारी को हराया, बल्कि उसके बाद वे दूसरे लोगों की जान बचाने के लिए आगे आए।
गुवाहाटी में बीएसएफ जवानों ने शनिवार को प्लाज्मा डोनेट किया। इन जवानों का कहना है कि वे देश की फ्रंट लाइन बॉर्डर गार्ड फोर्स के सदस्य हैं, ऐसे में उनका दायित्व है कि वे जैसे बॉर्डर की रक्षा करते हैं, वैसे ही सीमा के भीतर अपने लोगों की रक्षा करने में भी पीछे नहीं रहेंगे।
बीएसएफ जवानों ने जीएमसी अस्पताल, गुवाहाटी में प्लाज्मा दान किया है। पहले ये जवान कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे, उसके बाद इनका इलाज हुआ। तय समय की क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद ये ड्यूटी पर आ गए। इनमें से किसी ने भी अतिरिक्त छुट्टी की मांग नहीं की। न ही कोई जवान अपने घर गया।
बांग्लादेश सीमा पर तैनात इन जवानों से जब .ह पूछा गया कि वे अब ठीक हो चुके हैं और उन्हें दूसरे लोगों की मदद के लिए आना चाहिए। तो इन्होंने बिना कुछ सोचे समझे हां कर दी। शनिवार को दो जवानों ने प्लाज्मा डोनेट किया है। आने वाले दिनों में बाकी जवान भी प्लाज्मा देंगे।
यहां पर करीब डेढ़ दर्जन जवान कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। बीएसएफ के मुताबिक, सभी जवान प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आ रहे हैं। राष्ट्रीय संकट के समय सीमा सुरक्षा बल सीमांत मुख्यालय गुवाहाटी न केवल भारत-बांग्लादेश सीमा को संचालित करने में लगा हुआ है, बल्कि प्लाज़्मा दान कर सामाजिक कल्याण की दिशा में हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
संक्रमण से उभरने वाले बीएसएफ जवानों ने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अपने एंटीबॉडीज की स्थिति का आकलन करने के बाद दीक्षांत प्लाज्मा का दान किया है। इस वायरस के संक्रमण से उभरने वाले बीएसएफ फ्रंटियर गुवाहाटी के कई अन्य कर्मी भी कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए अपने प्लाज्मा दान करने के लिए तैयार हैं।